DB l एमपी हाईकोर्ट में पहली बार एक साथ 10 बेंचें बैठेंगी, हजारों लंबित जमानत अर्जियों का होगा फास्ट ट्रैक निराकरण l
पूरे देश में न्यायपालिका पर लंबित मामलों का भारी दबाव है। जमानत अर्जियों के मामले सीधे तौर पर लोगों की आज़ादी और जीवन से जुड़े होते हैं। आरोपी और उनके परिवार लंबे समय तक अदालतों की तारीख़ों के चक्कर काटते रहते हैं। ऐसे में जब तीन बेंचों पर हजारों फाइलें अटकी हों, तो न्याय की प्रक्रिया केवल कागज़ पर रह जाती है।

जबलपुर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्याय प्रक्रिया को तेज़ करने और लंबित मामलों का बोझ कम करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब एक साथ 10 स्पेशल बेंचें गठित की गई हैं, जो लंबित जमानत अर्जियों पर सुनवाई करेंगी। यह व्यवस्था शनिवार को लागू होगी और हजारों ऐसे मामलों को राहत मिलेगी, जिनमें लंबे समय से निर्णय का इंतज़ार हो रहा था।
सीजे संजीव सचदेवा ने यह पहल बार एसोसिएशन जबलपुर की मांग पर की है। बार एसोसिएशन अध्यक्ष डीके जैन और सचिव पारितोष त्रिवेदी ने हाल ही में सीजे से मुलाकात कर बताया था कि सिर्फ मुख्यपीठ में ही करीब 3 हजार जमानत अर्जियां लंबित हैं। फिलहाल सिर्फ तीन बेंचें ही इन मामलों की सुनवाई कर रही थीं, जिससे निपटान की गति बेहद धीमी थी। इसी वजह से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
नई व्यवस्था के तहत जिन न्यायाधीशों को जमानत अर्जियों की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया है, उनमें शामिल हैं – जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल।

एमपी हाईकोर्ट की इस नई पहल से न केवल जमानत अर्जियों के निपटारे की गति तेज होगी बल्कि अदालतों पर जनता का विश्वास भी मज़बूत होगा। न्याय पाने का इंतजार कर रहे हजारों लोगों को राहत मिलेगी और जेलों पर भी बोझ कम होगा।
हाईकोर्ट का यह कदम न्यायपालिका में सुधार की दिशा में एक बड़ा प्रयोग माना जा रहा है। अगर यह सफल होता है, तो देश के अन्य हाईकोर्ट भी इसे मॉडल के रूप में अपनाकर लंबित मामलों की संख्या घटा सकते हैं। न्याय में देरी को न्याय से वंचित होना माना जाता है। ऐसे में एमपी हाईकोर्ट की यह पहल ‘समय पर न्याय’ की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
