नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई। वांगचुक कथित तौर पर नीट परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, उनकी पत्नी गीतांजलि ने बिना परिवार और चिकित्सकों की सहमति के किसी भी प्रकार की दवा या तरल पदार्थ न दिए जाने की अपील की है।

भारत में भूख हड़ताल सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का प्रभावी माध्यम रही है। महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक सुधारों के लिए कई उपवास किए, जबकि भगत सिंह ने लाहौर जेल में भारतीय कैदियों के साथ भेदभाव के विरोध में ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी। पोटी श्रीरामुलु के 58 दिन के आमरण अनशन के बाद आंध्र राज्य का गठन हुआ।
आधुनिक दौर में अन्ना हजारे ने जन लोकपाल कानून की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया। इरोम शर्मिला ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाने की मांग में 16 वर्षों तक अनशन किया। वहीं ममता बनर्जी ने सिंगूर भूमि अधिग्रहण और मेधा पाटकर ने विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर भूख हड़ताल की थी।
सोनम वांगचुक का अनशन भी अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, भूख हड़ताल पर बैठे व्यक्ति को जबरन अस्पताल ले जाने का निर्णय परिस्थितियों और न्यायालय के निर्देशों पर निर्भर करता है, विशेषकर तब जब उसकी जान को खतरा होने की आशंका हो।
