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DB l जींद–सोनीपत रूट पर शुरू होगी देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेन, भारत दुनिया के चुनिंदा ‘ग्रीन रेल’ देशों की सूची में हुआ शामिल

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे आज हरित परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके साथ ही भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन तकनीक आधारित ट्रेनों का संचालन या परीक्षण किया जा रहा है।

यह ट्रेन जींद–सोनीपत रेलखंड पर चलेगी और इसमें 1200 किलोवाट क्षमता का हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी तथा यह लगभग 90 किलोमीटर की दूरी करीब 2 घंटे में तय करेगी। ट्रेन प्रतिदिन दो फेरे लगाएगी और लगभग 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इसमें एक समय में 682 यात्री सफर कर सकेंगे।

कैसे काम करेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन न तो डीजल इंजन पर निर्भर है और न ही ओवरहेड बिजली लाइनों पर। इसमें फ्यूल-सेल तकनीक के जरिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनाई जाती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, बल्कि केवल पानी की भाप निकलती है। इसलिए इसे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का भविष्य माना जा रहा है।

अलग ट्रैक नहीं, सामान्य पटरियों पर दौड़ेगी

रेल मंत्रालय के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन के लिए किसी विशेष रेलवे ट्रैक की आवश्यकता नहीं है। यह सामान्य रेल पटरियों पर ही संचालित होगी। जींद स्टेशन पर इसके लिए विशेष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र, गैस भंडारण टैंक और आधुनिक रीफ्यूलिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने इसके लिए आवश्यक लाइसेंस भी जारी कर दिया है।

‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ को मिलेगी रफ्तार

यह परियोजना केंद्र सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। रेलवे ने नई ट्रेन बनाने के बजाय मौजूदा डीजल ट्रेन को हाइड्रोजन तकनीक से अपग्रेड किया, जिससे परियोजना की लागत 150 करोड़ रुपये से घटकर 111.83 करोड़ रुपये रह गई। भविष्य में भारतीय रेलवे ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के तहत कई अन्य मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन करने की तैयारी कर रहा है। यह पहल भारत को स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन की दिशा में नई पहचान दिलाएगी।

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