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कर्मचारी और आदिवासियों के नाम पर अरबों की ज़मीन हड़पने के आरोप…

DB l भाजपा विधायक संजय पाठक पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपने कर्मचारियों और आदिवासी परिवारों के नाम पर फर्जी कंपनियां खड़ी कर अरबों की जमीनें हथिया लीं। सबसे चौंकाने वाला मामला सहारा सिटी की महंगी जमीन का है, जिसे पाठक ने अपनी बनाई कंपनी नायसा देव बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के जरिए औने-पौने दामों में खरीदा। सूत्रों के मुताबिक कंपनी का कर्ताधर्ता उनका ही कर्मचारी सचिन तिवारी था, जो न केवल जमीन खरीद-बिक्री बल्कि विधायक के जनसंपर्क से लेकर सभी गुप्त सौदों तक का जिम्मेदार माना जाता है।

जांच में खुलासा हुआ कि जबलपुर के तेवर स्थित सहारा सिटी की करीब 110 एकड़ जमीन 50 करोड़ में खरीदी गई, जबकि बाजार कीमत 200 करोड़ से कम नहीं थी। यहां तक कि 2014 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों में इसकी कीमत 125 करोड़ बताई गई थी। आरोप है कि जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क की भी चोरी की गई। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में नोटिस जारी कर कंपनी के बैंक खातों तक खंगाले, लेकिन माइनिंग कारोबार में पाठक के रसूख के चलते जांच ठंडी पड़ गई।

इतना ही नहीं, पाठक की तीन कंपनियों निर्मला मिनरल, आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और पेसिफिक एक्सपोर्ट के नाम पर जारी आठ खदानों में अवैध उत्खनन का खेल भी पकड़ा गया। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि पिछले दस सालों से हजारों एकड़ जमीन में अवैध खनन चल रहा था। गूगल सैटेलाइट जांच में करीब 443 करोड़ का अवैध उत्खनन सामने आया है। अब इस जुर्माने की वसूली की जिम्मेदारी जबलपुर कलेक्टर को दी गई है।

सबसे गंभीर आरोप बैगा जनजाति की जमीन पर कब्जे का है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कटनी, जबलपुर, डिंडौरी, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों को नोटिस जारी कर 30 दिन में रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर रिपोर्ट नहीं आई तो कलेक्टरों को अदालत जैसी कार्रवाई का सामना करना होगा। शिकायतकर्ता का दावा है कि पाठक ने अपने चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर करीब 1111 एकड़ जमीन बेनामी खरीदी। हैरानी की बात यह कि इनमें से तीन आदिवासी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं।

बैंक खातों की पड़ताल में खुलासा हुआ कि जमीन बेचने के एवज में आए करोड़ों रुपये सीधे पाठक और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों में ट्रांसफर किए गए। यह स्पष्ट करता है कि पूरी साजिश सुनियोजित थी और गरीब आदिवासियों को मोहरा बनाकर अरबों की जमीन हड़प ली गई।

कटनी से विजयराघवगढ़ के विधायक संजय पाठक की मुश्किलें अब लगातार बढ़ रही हैं। आदिवासियों के हक पर डाका डालने और खनन माफिया से गहरे संबंधों ने उनकी छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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