DB l मुश्किल होगा अमेरिका का जॉब सपना अब 88 लाख रुपये का सौदा…
अब H-1B वीजा आवेदन की फीस 100,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) कर दी गई है। यह अब तक की 215 डॉलर की फीस से कई गुना ज्यादा है। इस फैसले को अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में एक ऐतिहासिक बदलाव बताया जा रहा है।
ट्रंप के हस्ताक्षर वाले आदेश के मुताबिक, H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले किसी भी व्यक्ति को सालाना 1 लाख डॉलर का शुल्क देना अनिवार्य होगा। यह केवल नए आवेदनों पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा वीजा धारकों पर भी लागू होगा। इसके अलावा नियोक्ताओं को इस फीस के भुगतान का सबूत देना होगा। अगर यह भुगतान नहीं हुआ तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय या होमलैंड सिक्योरिटी विभाग आवेदन को खारिज कर देगा। केवल राष्ट्रीय हित से जुड़े कुछ अपवादों को ही छूट मिल सकती है।

व्हाइट हाउस का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के “दुरुपयोग” को रोकना और अमेरिकी श्रमिकों की नौकरियों की रक्षा करना है। ट्रंप का मानना है कि अब कंपनियां केवल तभी विदेशी वर्कर्स को नियुक्त करेंगी जब उन्हें वास्तव में उनकी आवश्यकता होगी। कॉमर्स सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि यह बदलाव अमेरिका के कानूनी आव्रजन ढांचे में एक “मौलिक परिवर्तन” है, जिसमें अब उन धनी आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो देश में बड़ा वित्तीय योगदान दे सकते हैं।
सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर, भारतीयों के लिए चुनौती
अमेरिका हर साल 85 हजार H-1B वीजा जारी करता है, जिसमें से 71% भारतीयों को मिलता है। चीन दूसरे स्थान पर है, लेकिन उसका हिस्सा केवल 11.7% है। H-1B वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले भारतीय छात्रों को मिलता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 65% भारतीय H-1B वीजा धारक कंप्यूटर से जुड़ी नौकरियों में काम करते हैं। औसतन उनका वेतन 1.18 लाख डॉलर सालाना होता है।

इस नए शुल्क की वजह से भारतीय इंजीनियरों, टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स और अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से पढ़ाई करने वाले छात्रों पर गहरा असर पड़ेगा। कई नियोक्ता इतनी भारी फीस देने से पीछे हट सकते हैं, जिससे वीजा के अवसर कम हो जाएंगे। जिन लोगों का करियर अमेरिका में शुरू होना था, उन्हें या तो दूसरा विकल्प तलाशना होगा या अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का यह नया आदेश भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए अमेरिका का सपना और महंगा ही नहीं बल्कि मुश्किल भी बना देगा। अब H-1B वीजा केवल उन लोगों की पहुंच में होगा, जिनके नियोक्ता इतनी बड़ी रकम चुकाने को तैयार होंगे।
