पीएम मोदी ने सराहा – स्वदेशी और समग्र विकास मॉडल पर जोर…
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि सरसंघचालक का भाषण राष्ट्र निर्माण में आरएसएस के योगदान को रेखांकित करता है और भारत की जन्मजात क्षमता को दर्शाता है, जिससे न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया लाभान्वित होगी।
आरएसएस की स्थापना 1925 में दशहरा के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी और इस बार संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। विजयादशमी उत्सव पर दिए गए संबोधन में मोहन भागवत ने शाखा प्रणाली की भूमिका, व्यक्तिगत चरित्र निर्माण और अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण पर आधारित विकास मॉडल की आवश्यकता है, जिससे भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सके।

संघ प्रमुख ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि बढ़ती असमानता, आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण, पर्यावरण क्षरण और लेन-देनवाद जैसी कमियों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि प्रचलित अर्थ व्यवस्था में शोषण का नया तंत्र खड़ा हो सकता है, जिससे समाज और प्रकृति दोनों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक विकास पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वदेशी और स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
भागवत ने स्पष्ट किया कि राजनयिक और आर्थिक संबंध दुनिया के साथ बनाए रखने होंगे, लेकिन पूर्ण निर्भरता से बचना होगा। उन्होंने चेताया कि जब सरकार जनता की समस्याओं से दूर रहती है, तो असंतोष बढ़ता है और हिंसक प्रदर्शन देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
इस संबोधन को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि मोहन भागवत ने भारत की नई ऊंचाइयों को छूने की क्षमता को रेखांकित किया है। विजयादशमी पर दिया गया यह संदेश संघ की वैचारिक शक्ति और राष्ट्र निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को फिर से सामने लाता है।
