0 0
Read Time:3 Minute, 0 Second

DB l पिछले करीब 45–50 दिनों में भारत समेत दुनिया के कई देशों की ऑयल रिफाइनरियों और तेल परिसंपत्तियों में आग और विस्फोट की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया है—क्या यह महज तकनीकी हादसे हैं या फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने की कोई सुनियोजित साजिश?

भारत में सबसे चर्चित मामला राजस्थान के पचपदरा (बाड़मेर) स्थित एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी का है, जहां 20 अप्रैल 2026 को उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले भीषण आग लग गई। इस रिफाइनरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को करना था। शुरुआती जांच में हीट एक्सचेंजर में हाइड्रोकार्बन लीक को कारण बताया गया है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और ATS जांच में जुटी हैं।

राजस्थान रिफाइनरी

इसी अवधि में अन्य देशों में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आईं। 1 मार्च को इक्वाडोर की एस्मेराल्डास रिफाइनरी, 17 मार्च को मेक्सिको की ओल्मेका रिफाइनरी, 23 मार्च और 10 अप्रैल को अमेरिका के टेक्सास स्थित वैलेरो और मैराथन रिफाइनरियों में आग लगी। 16 अप्रैल को ऑस्ट्रेलिया की कोरियो रिफाइनरी और 20 अप्रैल को म्यांमार में ईंधन टैंकरों में विस्फोट हुआ। ताजा मामला इराक के एरबिल से सामने आया है, जहां एक रिफाइनरी में विस्फोट की खबर है।

हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर देशों ने इन घटनाओं का कारण “तकनीकी खराबी” बताया है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने एक पैटर्न की आशंका को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित कर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ाने की कोशिश हो सकती है।

यह घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और तेल को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पहले ही प्रभावित है, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *