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DB l प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि बुंदेलखंड की संस्कृति ‘अद्भुत’ और ‘अविस्मरणीय’ है। शहीद स्मारक भवन के प्रेक्षागृह में शिक्षाविद डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव की 109वीं जयंती और 36वें बुंदेली दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन गुंजन कला सदन द्वारा किया गया।

समारोह में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा, डॉ. आनंद तिवारी, प्रतुल श्रीवास्तव और नरेन्द्र जैन सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। मंत्री लोधी ने इस अवसर पर कहा कि डॉ. श्रीवास्तव का साहित्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि महापुरुष बनाए नहीं जाते, बल्कि वे अपने कर्मों से खुद इतिहास रचते हैं।

श्री लोधी ने बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए आल्हा-ऊदल जैसे वीर योद्धाओं और रामराजा सरकार की परंपरा को प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड और जबलपुर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं और राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

साहित्य और लेखन की अहमियत पर जोर देते हुए मंत्री लोधी ने कहा कि “मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।” उन्होंने कहा कि आज समाज और राष्ट्र को तलवार नहीं, बल्कि कलम की ताकत की आवश्यकता है, जो आने वाले समय को उज्ज्वल दिशा दे सकती है।

समारोह में डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। साथ ही उपस्थित साहित्यकारों, कला प्रेमियों और जनप्रतिनिधियों का स्वागत और सम्मान किया गया।

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