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DB l केंद्र सरकार द्वारा पारित ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025 को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। रीवा की क्लबूबम 11 स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ पुष्पेंद्र सिंह ने इस एक्ट के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यह कानून युवाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और उनके भविष्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाईकोर्ट पहले ही फैंटेसी स्पोर्ट्स को कौशल-आधारित खेल मान चुके हैं। ऐसे में इसे जुए की श्रेणी में लाकर प्रतिबंधित करना न केवल न्यायालयों के फैसलों के विपरीत है, बल्कि लाखों युवाओं के अवसर भी छीनता है। आज के समय में ऑनलाइन गेमिंग और फैंटेसी स्पोर्ट्स ने रोजगार, निवेश और नए स्टार्टअप्स के लिए बड़ा प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इस उद्योग में हजारों लोग सीधे-परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि एक्ट से सामाजिक प्रभाव भी गहरे होंगे। युवा, जो अपनी कौशल-आधारित क्षमता और रणनीति के बल पर आगे बढ़ रहे थे, उनका कैरियर अधर में लटक जाएगा। यह कानून उनके संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों विशेषकर स्वतंत्रता और आजीविका के अधिकार का हनन करता है।

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई अगले हफ्ते के लिए तय की है। अब पूरा गेमिंग उद्योग, लाखों युवा और कानूनी विशेषज्ञ इस पर आने वाले फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह सुनवाई केवल कानून की वैधता पर ही नहीं, बल्कि युवाओं के सामाजिक व आर्थिक भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा से भी जुड़ी हुई मानी जा रही है।

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