जबलपुर। शहरवासियों को लंबे समय से प्रतीक्षित जबलपुर एलिवेटेड कॉरिडोर (फ्लायओवर ब्रिज) का उद्घाटन लगातार टल रहा है। इस देरी के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आए हैं —दो राजनीतिक और एक तकनीकी। इसके चलते अब यह मुद्दा शुद्ध विकास की जगह राजनीतिक रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है।
राजनीतिक कारण :
15 जून की कांग्रेस की रणनीति और संभावनाएँ-
कांग्रेस ने 9 जून को कलेक्टर को चार दिन का अल्टीमेटम दिया था। अगर तकरीबन चार दिनों (9–12 जून) में लोकार्पण नहीं हुआ, तो 15 जून (रविवार) को “जनता के साथ” प्रतीकात्मक उद्घाटन की बात कही जा रही है ।
यह कार्यकर्म ज़रूर प्रेस प्वाइंट/प्रदर्शन-केंद्रित होगा, न कि वास्तविक उद्घाटन — ताकि मीडिया और जनता को दिखाया जा सके कि सरकार ने जनता के साथ निष्क्रियता दिखाई ।
कांग्रेस की तैयारियाँ-
Youth Congress और स्थानीय कार्यकर्ता पहले से ही सक्रिय हैं। 11 जून को नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन हुआ और कुछ जगह छोटे विरोध प्रदर्शन और हल्की झड़पें भी देखी गईं । कमिटी स्तर पर क्षेत्र-विशेष के प्रतिनिधियों के साथ पहुँचने, मीडिया कवरेज, स्वयं “सराहनीय उद्घाटन” जैसे टूल्स की तैयारी की जाएगी।
बीजेपी की रणनीति और तैयारी-
बीजेपी को इस प्रतीकात्मक/प्रदर्शन-आधारित उद्घाटन की जानकारी है। वे इसे सरकार के वास्तविक उद्घाटन की ब्रेक के रूप में दिखाने की कोशिश में जुटे हैं।
पुलिस और प्रशासनिक तैयारी-
शहर में मासिक प्रशासनिक बैठकें और कॉल डिटेलिंग जारी है, जिससे सरकार को सरकारी दृश्यता मिलती रहे। पुलिस को प्रदर्शन नियंत्रण, ट्रैफिक डायवर्जन, और गेट के पास निगरानी बलों की तैनाती की तैयारी की जा रही है, खासकर कांग्रेस-बीजेपी नेताओं के आने-आगमन वाले मार्गों में। किसी अप्रत्याशित प्रदर्शन या दबाव पर कंट्रोल करने के लिए अतिरिक्त बल को सतर्क रखा गया है।
राजनीतिक श्रेय की खींचतान (सबसे बड़ा कारण)-
फ्लायओवर का निर्माण केंद्र और राज्य दोनों की निधि से हुआ है, जिसमें सांसद (पूर्व में राकेश सिंह, अब आशीष दुबे) और मंत्री (राकेश सिंह) दोनों की भूमिका रही है। मंत्री राकेश सिंह और सांसद आशीष दुबे — दोनों इसे अपनी उपलब्धि मानते हैं और उद्घाटन मंच पर प्रमुखता चाहते हैं। इसी को लेकर “कौन उद्घाटन करेगा” की होड़ शुरू हुई है और किसी निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन पा रही।
तकनीकी कारण :
ब्रिज में दरारें और गुणवत्ता जांच-
जनवरी 2025 में स्टे केबल ब्रिज वाले हिस्से में दरारें सामने आईं थीं। इसके बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे। इस पर एक तकनीकी जांच कमेटी बनाई गई, जिसमें PWD और अन्य विशेषज्ञों ने जांच कर कहा कि दरारें expansion joint के कारण हैं, गंभीर नहीं हैं।इसके बावजूद, सावधानी के तौर पर उद्घाटन को रोका गया ताकि कोई हादसा न हो।
आगामी निकाय चुनाव और प्रचार रणनीति:
यह फ्लायओवर वोट बटोरने वाला मुद्दा है, इसलिए संभव है कि भाजपा या सरकार चाहती है कि, उद्घाटन ऐसे समय पर हो जब जनता पर ज़्यादा असर हो (जैसे चुनाव के पास)। सामूहिक कार्यक्रम हो, जिसमें भाजपा नेताओं को प्रचार का मंच मिले।
जबलपुर का यह फ्लायओवर / एलिवेटेड कॉरिडोर लगभग 5.9 किमी लंबा है, जो दमोह नाका के पास से शुरू होकर रनिताल और मदन महल चौक तक जाता है।
विशेष संरचना: स्टे केबल ब्रिज – 385 मीटर लंबा (193 मीटर रेलवे लाइन के ऊपर), चौड़ाई लगभग 12.9 मीटर।
लेन व रैंप्स: तीन ट्रैफिक लेन और कई कनेक्टिव रैंप्स।
लोकार्पण में देरी की वजह कुछ भी हो जबलपुर की आम जनता को फ्लाईओवर के उद्घाटन का इंतज़ार है।
