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सुबह इज़राइल ने ऑपरेशन ‘राइजिंग लायन’ के तहत ईरान के कई शहरों पर बड़ा हवाई हमला कर दिया। इनमें तेहरान, नतांज, इस्फहान जैसे शहर शामिल हैं, जहां परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

13 जून, 2025 को ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत इज़राइल ने इरान में 100+ लक्ष्यों पर बड़े पैमाने पर हवाई और ड्रोन हमले किए जिसमें नाभिकीय सुविधा, सैन्य कमान केंद्र और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के आवास शामिल थे। इसमें 78 लोग मारे गए और 320 से अधिक घायल हुए, जिनमें अधिकांश नागरिक थे। इस हमले में 200 विमान और मोसाद कमांडो भी शामिल थे । यह हमला ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए किया गया।

इरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III नाम से लगभग 100+ बैलिस्टिक मिसाइल और 100+ ड्रोन इज़राइल की ओर छोड़े, जिससे केंद्रीय इलाकों, टेल अवीव और जेरूसलम सहित शहर प्रभावित हुए। कुछ मिसाइलें आयरन डोम से रोकी गईं, लेकिन कुछ ने निशाना साधा, तीन लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए ।
इरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह ख़ामेनेई ने इज़राइल को “ज़ायोनिस्ट शासन का विनाश” तक धमकी दी । इज़राइल ने इरानी ताकतों को कमजोर बताया । संयुक्त राष्ट्र महासचिव और वैश्विक शक्तियों जैसे यूएस, चीन, रूस, आदि ने संघर्ष विराम का आह्वान किया ।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इज़राइल के हमले की सराहना की, लेकिन तनाव को कम करने की बात कही; साथ ही अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य व राजनयिक कर्मचारी हटाना शुरू कर दिया ।

दोनों तरफ से और हमले संभावित हैं; क्षेत्रीय शक्तियाँ मध्यस्थता की कोशिश कर रही हैं।
इज़राइल स्पष्ट संदेश दे रहा है कि वह तत्काल नाभिकीय क्षति सहन नहीं करेगा। वहीं इरान जवाबी हमलावर रुख अपनाए हुए है। लेबनान, सीरिया, यमन आदि में प्रॉक्सी युद्ध से पूरा मध्य-पूर्व अस्थिर हो सकता है।

इजरायल ने हवाई हमले कर ईरान के आर्मी चीफ समेत टॉप कमांडरों को मार दिया था।

इज़राइल और ईरान के बीच जो हुआ, वह सिर्फ जवाबी हमलों का सिलसिला नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक सुरक्षा नीति को झकझोरने वाला दिन था।
इस संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया कि परमाणु महत्वाकांक्षाओं और प्रॉक्सी वार्स के बीच दुनिया अब और ज्यादा संवेदनशील हो गई है।

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