पश्चिम एशिया में इज़राइल और ईरान के बीच 4 दिन से जारी युद्ध की स्थिति इस समय बेहद गंभीर बनी हुई है।
इज़राइल ने चार दिनों की शुरूआती कार्रवाई के बाद अब तेहरान और पश्चिमी ईरान के व्यापक सैन्य और ऊर्जा-ढांचों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। इसमें तेल, गैस और परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया है ।इज़राइल ने करीब 3 लाख निवासियों को मध्य तेहरान से खाली करने का आदेश दिया, जिसके कारण लाखों लोग उत्तर की ओर पलायन कर रहे हैं; इससे शहर में ईंधन संकट व ट्रैफिक जाम जैसे हालात ट्रम्प ने G7 सम्मेलन बीच में छोड़ दिया और तेहरान की जनता से तत्काल निकासी की अपील की है ।
ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों की कम से कम नौ तरंगों में जवाब दिया, जिससे सैनिक और नागरिक दोनों की भारी क्षति हुई; प्रभाव यहाँ की बिखरे हुए शहरों और तेल गैस बुनियादी ढांचे में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है ।ईरान म अबतक लगभग 224 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश नागरिक हैं; 400 से अधिक घायलों की रिपोर्ट्स हैं । इज़राइल में कम से कम 24 नागरिक मारे गए और 500 से अधिक घायल हुए है ।
इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है—बल्कि यह पूरे विश्व, खासकर पश्चिम एशिया, यूरोप और दक्षिण एशिया के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है।
ईरान –इजराइल युद्ध की वजह से तेल और गैस क्षेत्र पर हमला होने के चलते Brent क्रूड तेल की कीमतों में 7% तक उछाल आया; तेल निर्यात व उत्पादन पर असर पड़ा है । यदि संघर्ष चक्र जारी रही, तो इंधन-आपूर्ति स्र्वव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव संभव है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण इन देशों की तेल और गैस पाइपलाइनों पर ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा बढ़ा है।
सऊदी अरब ने अपने रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। अगर ये युद्ध फैलता है, तो हज यात्राओं और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। तेल, गैस और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होने से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी का खतरा।
U S और G7 की नज़र संभावित क्षेत्रीय विस्तार और परमाणु आशंकाओं पर बनी हुई है। अमेरिका पहले ही अपनी नौसेना और सैन्य संसाधनों को पूर्वी भूमध्यसागर में भेज चुका है। अमेरिका को अब एक साथ दो मोर्चों (यूक्रेन और ईरान) पर युद्ध की संभावना को झेलना पड़ सकता है। अमेरिका पहले ही अपनी नौसेना और सैन्य संसाधनों को पूर्वी भूमध्यसागर में भेज चुका है।
यूरोप पहले से ही रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा संकट में था—अब मध्य पूर्व संकट ने स्थिति और बिगाड़ दी है। वैश्विक स्टॉक मार्केट गिर रहे हैं, निवेशकों में घबराहट है। बंदरगाहों और हवाई मार्गों की सुरक्षा चिंता बन गई है।
पश्चिम एशिया का आकाश युद्ध क्षेत्र में बदल चुका है। ईरान, इराक, सीरिया और इज़राइल के ऊपर से जाने वाले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय मार्ग बंद या प्रतिबंधित हो गए हैं। एयरलाइनों को हजारों किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों बढ़ गया है।
भारत से मिडिल ईस्ट, यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों का रास्ता लंबा और खर्चीला हुआ। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की वापसी या यात्रा अब जोखिम भरी हो गई है। वंदे भारत जैसे विशेष मिशनों की जरूरत पड़ सकती है यदि हालात और बिगड़ते हैं। भारत से इज़राइल की सीधी फ्लाइट बंद कर दी गई है।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठन संघर्ष विराम की अपील कर रहे हैं ।
