DB l जबलपुर का सबसे लंबा फ्लाईओवर शहरवासियों के लिए सुविधा तो लाया है, लेकिन इसके साथ कई समस्याएँ भी सामने आई हैं। मदन महल से दमोह नाका तक बनी इस संरचना पर खतरनाक लैंडिंग, तेज रफ्तार वाहन और यू-टर्न की कमी लगातार एक्सीडेंट का खतरा पैदा कर रही हैं। रात में बाइकर्स की रफ्तार, हॉर्न की आवाज़ और कोलाहल से आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है।

सिर्फ़ सड़क की कमी ही नहीं, फ्लाईओवर के किनारे बने आवासीय इलाके में रहने वाले लोग ताका-झांकी और निजता के उल्लंघन से भी परेशान हैं। लोग गाड़ी रोककर झांकी करते हैं, फ्लाईओवर से कचरा फेंका जाता है, और कभी-कभी अनैतिक गतिविधियाँ भी सामने आती हैं।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। एंट्री-एक्जिट पॉइंट्स पर संकेतक लगाने, व्यू कटर स्थापित करने और पर्याप्त बल तैनात करने के आदेश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यही है—क्या केवल कोर्ट या प्रशासन के आदेश से इन समस्याओं से निजात मिल जाएगी?

असल समाधान हमारी अपनी सोच और व्यवहार बदलने में है। तेज रफ्तार गाड़ी चलाना, नियम तोड़ना, कचरा फेंकना और दूसरों की निजता में दखल देना हमारी आदत बन चुकी हैं। जब तक हम व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, चाहे कितनी भी योजना या आदेश आए, समस्याएँ बनी रहेंगी।
फ्लाईओवर केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि हमारे समाज का आईना है। सड़क के नियमों का पालन करना, रफ्तार नियंत्रित रखना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रशासन और अदालत दिशा दिखा सकते हैं, लेकिन असली बदलाव हमारे व्यक्तिगत व्यवहार से ही संभव है।
