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कोलकाता और आसपास के इलाकों में बीती रात हुई भारी बारिश ने 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। आधी रात के बाद लगातार पांच घंटे हुई बारिश से शहर की सड़कें तालाब बन गईं, कई घरों में पानी घुस गया और पूजा पंडालों की तैयारियों पर भी असर पड़ा। जलजमाव और करंट लगने की घटनाओं में सात लोगों की मौत हो गई।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण मंगलवार को गारिया में 332 मिमी, जोधपुर पार्क में 285 मिमी और कालीघाट में 280 मिमी बारिश दर्ज की गई। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने बताया कि सितंबर महीने में पिछले चार दशक में इतनी बारिश कभी नहीं हुई।

भारी जलजमाव से सड़क, रेल, मेट्रो और हवाई सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई। मेट्रो की ब्लू लाइन पर महानायक उत्तम कुमार और रवींद्र सरोवर स्टेशनों के बीच पानी भरने से सेवाएं रोकनी पड़ीं। सीलदह दक्षिण खंड में ट्रैक डूबने से ट्रेनें बंद हो गईं, जबकि हावड़ा और कोलकाता टर्मिनल से भी परिचालन बाधित रहा। हवाई सेवा भी प्रभावित हुई, कई उड़ानों में देरी हुई।

शहर की सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे यातायात ठप हो गया और लोगों को दफ्तर-स्कूल जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई स्कूलों ने छुट्टी की घोषणा कर दी है ।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में दक्षिण बंगाल के जिलों—पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना, झारग्राम और बांकुड़ा—में और भारी बारिश हो सकती है। साथ ही 25 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक और नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे बारिश का दौर और लंबा खिंच सकता है।

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