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केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM Dhan-Dhanya Krishi Yojana) को हरी झंडी दे दी है। यह योजना देश के 100 कृषि-पिछड़े जिलों में लागू की जाएगी और इसके लिए प्रति वर्ष ₹24,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और खाद्यान्न सुरक्षा को मजबूत करना है। छह साल की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सरकार करीब 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने की तैयारी में है।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत किसानों को सिंचाई, बीज, भंडारण, कृषि उपकरण, प्रशिक्षण और कर्ज़ जैसी सुविधाएं एकीकृत रूप से मिलेंगी।

इसके अलावा कैबिनेट ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी दो बड़े निवेशों को मंजूरी दी है। एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) को हरित ऊर्जा परियोजनाओं में ₹7,000 करोड़ रुपये, जबकि एनटीपीसी को ₹20,000 करोड़ रुपये के निवेश की अनुमति दी गई है। यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई एनआईआरएल (NIRL) में ₹7,000 करोड़ रुपये के निवेश की अनुमति दे दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में लिया गया। इस निर्णय के तहत एनएलसीआईएल को मौजूदा निवेश दिशानिर्देशों से विशेष छूट दी गई है, जो आमतौर पर नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) पर लागू होती हैं।

केंद्र सरकार ने बुधवार को एनटीपीसी लिमिटेड को 2032 तक 60 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ₹20,000 करोड़ रुपये तक निवेश की अनुमति दे दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में लिया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक एनटीपीसी के लिए स्वीकृत निवेश सीमा ₹7,500 करोड़ थी, जिसे इस निर्णय के तहत तीन गुना से अधिक बढ़ा दिया गया है। यह कदम भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, हरित विकास और कार्बन उत्सर्जन में कटौती की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एनटीपीसी इस निवेश का उपयोग सौर, पवन, हाइड्रोजन और अन्य अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में करेगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत में साफ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी और नौकरी के नए अवसर भी पैदा होंगे, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में।

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