DB l ‘थर्ड वर्ल्ड’ प्रवासियों पर बैन की चेतावनी…
व्हाइट हाउस के पास हुए हमले के बाद अमेरिका में सुरक्षा और इमिग्रेशन को लेकर बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को घोषणा की कि 19 देशों से आने वाले सभी लोगों के ग्रीन कार्ड्स की दोबारा कठोर जांच की जाएगी। यह निर्देश उस घटना के तुरंत बाद आया है जिसमें एक अफगान मूल के व्यक्ति ने नेशनल गार्ड के दो जवानों पर गोली चलाकर एक को मौत के घाट उतार दिया और दूसरे को गंभीर रूप से घायल कर दिया।

USCIS के निदेशक जो एडलो ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति के आदेश पर ‘फुल-स्केल और कठोर समीक्षा’ शुरू कर दी गई है। इस जांच में FBI भी शामिल है और हमला आतंकवादी घटना के रूप में देखा जा रहा है। जिन 19 देशों के नागरिकों की जांच हो रही है, उनमें अफगानिस्तान, ईरान, सोमालिया, सूडान, यमन, कांगो गणराज्य, हैती, लाओस, क्यूबा, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला सहित कई देश शामिल हैं। राहत की बात यह है कि भारत इस सूची में नहीं है।
हमले के बाद होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने बाइडेन प्रशासन के समय स्वीकृत सभी आश्रय (Asylum) मामलों की समीक्षा का आदेश भी दिया है। विशेष रूप से अफगान नागरिकों की इमिग्रेशन प्रोसेसिंग को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, जब तक कि सुरक्षा प्रोटोकॉल फिर से अपडेट नहीं किए जाते। FBI इसे “कोस्ट-टू-कोस्ट इन्वेस्टिगेशन” के रूप में जांच रही है और कई राज्यों में सर्च वारंट जारी किए गए हैं।

इस घटना के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक और विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह “थर्ड वर्ल्ड देशों” से लोगों का अमेरिका में माइग्रेशन स्थायी रूप से रोक देंगे। उन्होंने संकेत दिया कि गैर-नागरिकों को मिलने वाले संघीय लाभ, सब्सिडी और नागरिकता को भी रद्द किया जा सकता है, यदि वे अमेरिकी सुरक्षा या स्थिरता के लिए ‘खतरा’ माने जाते हैं। हालांकि ट्रंप ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस संभावित प्रतिबंध में भारत शामिल होगा या नहीं।
लेकिन सवाल यह है—थर्ड वर्ल्ड देश आखिर हैं कौन?
“तीसरी दुनिया” की अवधारणा शीत युद्ध के दौरान पैदा हुई थी, जब दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ के दो ब्लॉक्स में बंटी थी। जो देश किसी भी गुट से नहीं जुड़े थे, उन्हें तीसरी दुनिया कहा गया। भारत भी उस समय गुटनिरपेक्ष होने के कारण ‘थर्ड वर्ल्ड’ कहा जाता था। लेकिन यह टर्म अब पुराना और अपमानजनक माना जाता है।
आज के दौर में संयुक्त राष्ट्र “अल्प विकसित देशों (LDCs)” की सूची को मान्यता देता है। दिसंबर 2024 तक दुनिया के 44 देश इस सूची में हैं—32 अफ्रीकी, 8 एशियाई, 1 कैरेबियन और 3 प्रशांत क्षेत्र के देश। भारत इनमें शामिल नहीं है और आज तेजी से विकसित होती विश्व अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
ट्रंप के नए फैसलों ने अमेरिका में प्रवासी नीति को लेकर नई बेचैनी जरूर पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर और गहरा देखने को मिलेगा।
