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DB l बांग्लादेश की मांग ने बढ़ाया राजनयिक तनाव ।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने के अनुरोध पर भारत ने कहा है कि वह मामले की न्यायिक व कानूनी प्रक्रिया के तहत विस्तृत समीक्षा कर रहा है। बुधवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि बांग्लादेश से प्राप्त अनुरोध पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों, शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।

अवामी लीग की नेता और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पिछले वर्ष 5 अगस्त को भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद देश छोड़कर भारत आई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने हाल ही में उन्हें मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई है। 453 पन्नों के फैसले में जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, हत्याओं और कथित आदेशों के लिए उन्हें दोषी ठहराया गया।

इसके अलावा बांग्लादेश की एक अन्य अदालत ने भ्रष्टाचार से जुड़े तीन मामलों में उन्हें 21 साल कैद की सजा सुनाई है। इन मामलों के चलते बांग्लादेश सरकार लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। दिसंबर 2024 में बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से भारत को एक्सट्रडिशन रिक्वेस्ट भेजी थी, जिसके बाद यह मामला दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण राजनयिक मुद्दा बना हुआ है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसके मुखिया नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस हैं, ने दोबारा भारत से मांग की है कि शेख हसीना को लौटाया जाए ताकि उनके खिलाफ मानवता-विरोधी अपराधों, भ्रष्टाचार और पिछले 15 वर्षों के शासनकाल से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जा सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि भारत इस पूरी प्रक्रिया को कानून, मानवाधिकार और न्यायिक मानकों के अनुसार ही आगे बढ़ाएगा।

राजनयिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला संवेदनशील है और भारत का अंतिम निर्णय क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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