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DB l एक्सपर्ट बोले– ‘तेजस नहीं, Su-30 चाहता है येरेवन’, HAL चीफ ने कहा– विमान में कोई कमी नहीं

दुबई एयरशो में पिछले हफ्ते भारतीय वायुसेना का तेजस फाइटर जेट करतब दिखाते समय क्रैश हो गया था। अल मकतूम एयरपोर्ट पर हुए इस हादसे के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कई सोशल प्लेटफॉर्म पर तेजस की संभावित विदेशी डीलों को लेकर कई तरह के दावे सामने आने लगे। इज़राइली मीडिया सहित कई स्रोतों ने दावा किया कि हादसे के बाद आर्मीनिया ने भारत के साथ तेजस खरीदने की बातचीत रद्द कर दी है। लेकिन भारतीय एक्सपर्ट्स ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है।

रिपोर्टों में कहा गया था कि भारत, HAL और आर्मीनिया के बीच 1.2 अरब डॉलर में 12 तेजस की डील लगभग तय थी, जिसे दुबई क्रैश के बाद रोक दिया गया। हालांकि, एक्सपर्ट बताते हैं कि आर्मीनिया ने भारत से तेजस खरीदने के लिए कभी कोई औपचारिक बातचीत शुरू ही नहीं की।
विशेषज्ञों के अनुसार आर्मीनिया तेजस नहीं बल्कि Su-30MKI फाइटर जेट खरीदने में दिलचस्पी रखता है। अक्टूबर 2024 में आर्मीनिया और भारत के बीच एक दर्जन Su-30MKI वेरिएंट पर बातचीत शुरू हुई थी। भारत इस उन्नत लड़ाकू विमान का निर्माण HAL की सुविधा में लाइसेंस के तहत करता है।

डिफेंस रिस्क इंटेलिजेंस फर्म RANE के डायरेक्टर सैम लिचेंस्टीन के अनुसार, आर्मीनिया Su-30MKI खरीदने पर फोकस कर रहा है और तेजस उसके विकल्पों में शामिल नहीं था। इसलिए दुबई हादसे को किसी डील से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत है।

Su-30MK

रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट (RUSI) के विशेषज्ञ वाल्टर लैडविग भी बताते हैं कि फाइटर जेट की बिक्री तकनीकी नहीं, बल्कि जियोपॉलिटिकल वास्तविकताओं पर निर्भर करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 1999 में पेरिस में रूस का Su-30 क्रैश हुआ था, लेकिन उसकी वजह से कोई वैश्विक डील नहीं रुक गई। उनका कहना है कि तेजस के मामले में भी यही लागू होता है।

इस बीच, HAL के चेयरमैन और MD डीके सुनील ने दुबई हादसे को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए साफ कहा कि इससे तेजस कार्यक्रम या उसकी छवि पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने तेजस को “दुनिया के सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय फाइटर जेट्स में से एक” बताया।
उनके मुताबिक तेजस का सिर्फ दो बार क्रैश होना, वह भी वर्षों की सेवा के बाद, उसके बेहतरीन सुरक्षा रिकॉर्ड का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि मलेशिया, अर्जेंटीना, मिस्र और फिलीपींस जैसे कई देश तेजस में रुचि दिखा रहे हैं और आने वाले समय में इसके लिए एक बड़ा एक्सपोर्ट बाजार तैयार होगा।

HAL भविष्य में U-CAV CATS Warrior और UHM जैसे उन्नत प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है, जो 2026–27 तक उड़ान भरने लगेंगे। भारत सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात को 35,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का है।
दुबई घटना के शोर-गुल के बावजूद, विशेषज्ञ और HAL स्पष्ट कर चुके हैं कि तेजस की सुरक्षित तकनीक और भारत की रक्षा क्षमता पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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