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DB l जबलपुर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर होने पर जस्टिस अतुल श्रीधरन को गुरुवार को हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से भावभीनी विदाई दी गई। यह विदाई सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि उस न्यायाधीश के लिए भावनात्मक क्षण था, जिसने पिछले सात महीनों में तीन बार तबादला झेला है। समारोह के दौरान जस्टिस श्रीधरन काफी भावुक दिखे और उन्होंने अपने कार्यकाल को “एक प्रयोगात्मक चरण” बताया।

जस्टिस श्रीधरन ने अपने संबोधन में कहा, “इस अखाड़े में केवल एक ही चीज़ स्थायी है — अस्थिरता।” उन्होंने अपने मनोभाव व्यक्त करते हुए मशहूर शायर राहत इंदौरी का शेर पढ़ा—
“जो आज साहिब-ए-मसनद हैं, कल नहीं होंगे,
किरायेदार हैं, ज़ाती मकान थोड़ी है…”
उनके इस शेर ने समारोह में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं।

जस्टिस श्रीधरन का न्यायिक सफर कई तबादलों से गुजरा। अप्रैल 2023 में उन्हें मद्रास हाई कोर्ट से जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट भेजा गया था, क्योंकि उनकी बेटी वहां उनके खिलाफ वकालत कर रही थी। इसके बाद मार्च 2025 में उन्हें जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट स्थानांतरित किया गया। फिर अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका तबादला रद्द करते हुए उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने की सिफारिश की। इन लगातार तबादलों का असर उनकी वरिष्ठता पर भी पड़ा — जम्मू-कश्मीर में जहां वे दूसरे स्थान पर थे, वहीं बाद में वे वरिष्ठता सूची में चौथे स्थान पर आ गए।

जबलपुर हाई कोर्ट में अपने छोटे कार्यकाल के बावजूद जस्टिस श्रीधरन ने कई अहम मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। दमोह में युवक से पैर धुलवाकर पानी पिलवाने की घटना और कर्नल सोफिया कुरैशी के अपमान मामले में उन्होंने सख्त रुख अपनाया और मंत्री विजय शाह सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे।

जबलपुर बार एसोसिएशन, न्यायाधीशों, वकीलों और अधिकारियों ने जस्टिस श्रीधरन को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। हाई कोर्ट परिसर में आयोजित यह विदाई समारोह भावनाओं से भरा हुआ रहा, जहां न्याय के लिए समर्पित एक बेबाक जज को सभी ने तालियों की गूंज और नम आंखों से विदा किया।

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