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DB l शाह बोले – लालू-राहुल का सूपड़ा साफ, अब दूसरे चरण में संग्राम तेज।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है और इस बार राज्य ने इतिहास रच दिया है। 18 जिलों की 121 सीटों पर हुए मतदान में रिकॉर्ड 64.69% वोटिंग हुई, जो बिहार के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि “बिहार ने पूरे देश को दिशा दिखाई है।”

पहले चरण की बंपर वोटिंग के बाद अब दूसरे चरण की तैयारी जोरों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और योगी आदित्यनाथ जैसे दिग्गज नेता मैदान में उतर चुके हैं। जमुई में जनसभा के दौरान अमित शाह ने लालू यादव और राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा, “पहले फेज के बाद लालू-राहुल का सूपड़ा साफ हो गया है। बिहार को फिर से जंगलराज में नहीं लौटने देना है।” उन्होंने जनता से कमल और तीर के निशान पर वोट देने की अपील की।

पहले चरण की वोटिंग में कई दिग्गज नेताओं की किस्मत EVM में बंद हो गई है, जिनमें तेजस्वी यादव, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, तेज प्रताप यादव, खेसारी लाल यादव और मैथिली ठाकुर शामिल हैं। मुजफ्फरपुर जिले में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया, जबकि छपरा और बक्सर में कुछ जगहों पर मतदान बहिष्कार और मामूली हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।

चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार 100% पोलिंग स्टेशनों पर लाइव वेबकास्टिंग और उम्मीदवारों के रंगीन फोटो वाली EVM का उपयोग हुआ, जिससे पारदर्शिता बढ़ी। सीईसी ने कहा कि यह अब तक का सबसे पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव रहा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ी हुई वोटिंग राज्य की सत्ता के समीकरण को बदल सकती है। इतिहास बताता है कि जब भी वोटिंग प्रतिशत में 5% से अधिक उछाल आया, बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। 1967 में कांग्रेस का पतन हुआ, 1990 में लालू यादव का युग शुरू हुआ और 2005 में नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली। इस बार 8.98% की बढ़ोतरी को सत्ता परिवर्तन का संकेत भी माना जा रहा है।

सीनियर पत्रकार पुष्यमित्र का मानना है कि महिलाओं और कोर वोटर्स की बढ़ती भागीदारी से नीतीश को फायदा होगा, जबकि राजनीतिक विश्लेषक हेमंत कुमार का कहना है कि “इतिहास गवाही देता है, जब-जब वोटिंग बढ़ी है, तब-तब सत्ता बदली है।”

दूसरे चरण के चुनाव प्रचार के साथ बिहार का सियासी संग्राम अब और गरमाने लगा है। सभी की नजरें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि बंपर वोटिंग नीतीश कुमार की कुर्सी बचाएगी या बिहार में एक नया अध्याय लिखेगी।

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