DB l संस्कारधानी जबलपुर, मध्य प्रदेश के उन दो शहरों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले सामने आते हैं। अनुमान है कि शहर में करीब 50 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं। हर दिन औसतन 15 लोग इनके हमले का शिकार बनते हैं। 1 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2025 के बीच ही लगभग 400 डॉग बाइट केस दर्ज किए गए। सुप्रीम कोर्ट में डॉग बाइट मामले की सुनवाई के दौरान भी जबलपुर का जिक्र हुआ था।
जबलपुर की सामाजिक संस्था नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने नगर निगम को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाएंगे। संस्था के संरक्षक डॉ. पी. जी. नाज पांडे ने कहा कि “अगर निगम ने कुछ दिनों में कदम नहीं उठाया, तो हम सुप्रीम कोर्ट में पार्टी बनकर जवाब तलब करेंगे।” यह संस्था अब तक 500 से ज्यादा जनहित याचिकाएं दाखिल कर चुकी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर जगत बहादुर सिंह ने 21 सदस्यीय समिति गठित की है, जिसमें निगम अधिकारी, कुत्ता पकड़ने और नसबंदी करने वाली टीमों के साथ वेटरनरी विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। महापौर ने बताया कि शहर में नसबंदी अभियान को और तेज किया जाएगा, हालांकि डॉग लवर्स के विरोध के कारण अभियान में दिक्कतें आती हैं
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसे सार्वजनिक स्थलों से हटाकर शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन. वी. अंजारिया की पीठ ने आदेश दिया कि सभी राज्यों में संयुक्त अभियान चलाकर आवारा पशुओं को सड़क और संस्थानों से हटाया जाए। अदालत ने कहा कि सभी सरकारी परिसरों में बाड़ लगाई जाए ताकि कुत्ते अंदर न आ सकें और 8 हफ्तों के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए

सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि निगम जल्द ठोस कदम उठाएगा ताकि बढ़ते डॉग बाइट के मामलों पर रोक लग सके और शहरवासियों को राहत मिले
