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DB l हवाला कांड ने बढ़ाई सियासी और प्रशासनिक बेचैनी, जांच में खोले जाएंगे तमाम राज…

सिवनी-बिखरी अफ़वाहें, राजधानी में सन्नाटा… जबलपुर-सिवनी के हवाला कांड ने पुलिस-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मामला जब सामने आया कि 1.45 करोड़ रुपये जब्त हुए हैं और इसके पीछे लगभग 3 करोड़ की रकम की बात हो रही है, तो प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए — पर सवाल खड़े हैं कि क्यों इस समय तक पूरा सारा सच सामने नहीं आया।

10 अक्टूबर से एएसपी आयुष गुप्ता जबलपुर आईजी प्रमोद वर्मा के निर्देशन में मामले की गहन जांच कर रहे हैं। उन्हें इस जांच की रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। 13 अक्टूबर की सुबह सिवनी पुलिस कंट्रोल रूम में जब आईजी व छिंदवाड़ा के डीईजी राकेश कुमार सिंह भी आ गए, तब पूरे जांच तंत्र में हड़कंप मच गया। कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिस कप्तान, एएसपी सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल एवं दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं। जांच अभी जारी है, लेकिन लगता है कि शाम तक इस मामले की अबतक की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आ सकती है।

हवाला कांड की चिंगारी से उठता धुआँ अभी बंद नहीं हो रहा — इसमें एसडीओपी, टीआई सहित 11 पुलिस कर्मियों को निलंबित किया जा चुका है, पर अभी तक उच्च स्तर पर नामों का खुलासा नहीं हुआ। लखनवाड़ा पुलिस थाने में 11 अक्टूबर की रात 1.45 करोड़ रुपये जब्त करने पर एफआईआर दर्ज हुई और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। पर अन्य दिन — 8-9 अक्टूबर की रात — शिकायत में 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की बात कही गई थी, जो कि अभी तक न्यायालय जांच में खुल कर सामने नहीं आई है।

मामले की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि लखनवाड़ा थाने के प्रभारी चंद्रकिशोर सिरामे का निलंबन आदेश पहले जारी हुआ, लेकिन बाद में आईजी वर्मा ने उसे निरस्त कर दिया। निलंबन आदेश में लिखा गया था कि जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाई गई है।
सीएसपी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, तथा अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
श्वेत रंग की क्रेटा कार (MH 13 EK 3430) में सवार इरफान पठान, शेख मुख्तार एवं सोहन परमार मुख्य संदिग्ध हैं। कार से जब्त नकदी बंडल में 29 बोरियों में कुल ₹1.45 करोड़ मिले हैं। आरोप है कि शेष रकम कहीं और ले जाई गई।

कुछ अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच चल रही है, इसीलिए खुलकर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन इस लंबी चुप्पी ने संदेह और अफ़वाहों को हवा दी है। जनता जानना चाहती है — आखिर कितनी लापरवाही हुई? कितने नाम दलदल में दबे रहेंगे? और क्या इस कांड की शर्मनाक पोल खुल ही पाएगी?

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