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DB l बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग 30 सितंबर को नई मतदाता सूची जारी करेगा। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद प्रकाशित होने वाली यह सूची राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाएगी। नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त दलों को यह सूची निःशुल्क दी जाएगी, जबकि अन्य पंजीकृत दलों को शुल्क चुकाना होगा। सूची प्रिंटेड कॉपी, सीडी, पीडीएफ और पेन ड्राइव के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 के तहत यह व्यवस्था की गई है ताकि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे। सूची में मतदाता का नाम, पता, आयु, लिंग और फोटो दर्ज होता है। आयोग समय-समय पर संशोधित या पूरक सूचियां भी जारी करता है।

बिहार में मतदाता सूची सुधार के अनुभव और फीडबैक को ध्यान में रखते हुए अब यूपी और मध्यप्रदेश में भी 22 साल बाद विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारी शुरू हो गई है। यूपी में आखिरी बार 2003 में SIR हुआ था। उस समय मतदाताओं की संख्या 6 करोड़ से कम थी, जो अब बढ़कर 15.35 करोड़ से ऊपर हो चुकी है। इस बार फोकस डुप्लीकेट, अवैध और मृत मतदाताओं के नाम हटाने पर रहेगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने 2003 की वोटर लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी है ताकि लोग अपनी पुरानी स्थिति देख सकें।

मध्यप्रदेश में भी 2003 के बाद पहली बार गहन परीक्षण होगा। भोपाल में 22 साल पहले 11.81 लाख मतदाता थे, जो अब 21 लाख से ज्यादा हो गए हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि जिनका नाम 2003 की सूची में नहीं है, उन्हें पहचान के तीन दस्तावेज देने होंगे। वहीं जिनके पिता का नाम दर्ज है, उन्हें केवल एक दस्तावेज देना होगा।

बीएलओ घर-घर जाकर न्यूमेरेशन फॉर्म बांटेंगे और ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। मतदाताओं को तय समयसीमा में फार्म भरकर जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। लापरवाही बरतने वाले बीएलओ पर कार्रवाई भी तय की गई है।

बिहार में नई वोटर लिस्ट जारी होने के साथ ही यूपी और एमपी में गहन पुनरीक्षण की इस कवायद से करोड़ों मतदाताओं के नाम अपडेट होंगे और चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

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