जबलपुर। हाईकोर्ट ने इंडिगो समेत अन्य विमान कंपनियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जबलपुर से हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए 15 दिन में ठोस सुझाव पेश करें। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने साफ कहा कि 500 करोड़ रुपये एयरपोर्ट विस्तार पर खर्च करने के बाद भी शहर को महज 9 फ्लाइट्स मिलना बेहद गंभीर लापरवाही है।
जनहित याचिका में तर्क दिया गया कि भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों से कहीं अधिक हवाई सेवाएं हैं, जबकि महाकौशल का सबसे बड़ा शहर जबलपुर उपेक्षित है। वकील आदित्य सांघी ने कोर्ट को बताया कि 2011 से विस्तार का वादा किया गया, एयरपोर्ट को ब्राउनफील्ड में बदला गया, टिकटों के दाम बढ़े, लेकिन फ्लाइट्स की संख्या घट गई। सांघी ने कहा, “500 करोड़ उड़ गए, लेकिन 15–20 फ्लाइट्स की बजाय आज सिर्फ 9 ही बचीं। यह जनता के साथ सरासर धोखा है।”

विमान कंपनियों के वकील सिद्धार्थ शर्मा ने दलील दी कि केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने कई रियायतें दी हैं, लेकिन केंद्र को भी ठोस कदम उठाना चाहिए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कंपनियों को निर्देश दिया कि नई हवाई सेवाओं और समय सारिणी में बदलाव को लेकर ठोस सुझाव दें। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
हाईकोर्ट का रुख साफ है – जनता के टैक्स के 500 करोड़ झोंकने के बाद भी अगर जबलपुर को महज 9 फ्लाइट्स ही मिलती हैं, तो यह जनता के साथ धोखा और सरकारी उदासीनता का खुला सबूत है। अब कंपनियों और केंद्र सरकार को जवाब देना ही होगा कि आखिर कब तक जबलपुर को हवाई संपर्क के मामले में दोयम दर्जे का शहर बनाए रखा जाएगा।
