DB l नई दिल्ली: लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान उठे एपस्टीन फ़ाइल विवाद ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी, जबकि कांग्रेस ने छह सवाल दागते हुए केंद्र से स्पष्ट जवाब मांगा है। सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के आरोपों को “निराधार” बताया है।
बुधवार को बजट पर बोलते हुए राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने “आत्मसमर्पण” किया है। इसी दौरान उन्होंने जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के नाम जुड़े हैं। राहुल गांधी ने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि परिचय किसने कराया और इसकी प्रकृति क्या थी।

आरोपों के बाद हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वे 2009 से 2017 तक न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत रहे और इस दौरान अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधिमंडलों के हिस्से के रूप में एपस्टीन से “संभवतः तीन या चार बार” मिले। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) और संबंधित प्रोजेक्ट्स के संदर्भ में कुछ मौकों पर मुलाक़ात हुई थी, लेकिन एपस्टीन किसी आधिकारिक भूमिका में शामिल नहीं थे। पुरी ने स्पष्ट किया कि एपस्टीन से जुड़े मामलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है और जो भी ईमेल संवाद हुआ, वह सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है।
पुरी की सफाई के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर छह सवाल उठाए। इनमें पूछा गया कि 4 अक्टूबर 2014 के कथित ईमेल में एपस्टीन को रीड हॉफमैन से मुलाकात की जानकारी पहले कैसे थी? क्या वही संपर्क सूत्र था? ‘दोस्त’ शब्द का इस्तेमाल क्यों हुआ? और यदि संबंध सतही थे तो सलाह क्यों मांगी गई? कांग्रेस का कहना है कि पूरे मामले में पारदर्शिता आवश्यक है।

वहीं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को “बिना सबूत और निराधार” बताया। उन्होंने कहा कि भाषण में कही गई “ग़लत बातें” कार्यवाही से हटाई जाएंगी। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी पर झूठे आरोप लगाने और संसदीय मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में जेफ़री एपस्टीन से जुड़े 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों में विभिन्न प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम होने की चर्चा है, हालांकि किसी भी संदर्भ की कानूनी पुष्टि अलग प्रक्रिया का विषय है।
फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। एक ओर कांग्रेस पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर सरकार इसे राजनीतिक हमला बता रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस विवाद पर और आधिकारिक दस्तावेज या स्पष्टीकरण सामने आते हैं, या यह मुद्दा सियासी बहस तक सीमित रह जाता है।
