हाल ही में दिल्ली के दयालपुर क्षेत्र में एक 9 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है ।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली थाना दयालपुर इलाके के डी ब्लॉक से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है । यहां एक 9 साल की मासूम बच्ची खून से लथपथ एक फ्लैट में सूटकेस में मिली। बताया जा रहा है कि बच्ची करीब दो घंटे तक सूटकेस में थी, इसकी सूचना जैसे ही परिजनों को लगी, उन्होंने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया ।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि दयालपुर पुलिस स्टेशन में रात 8:41 बजे पीसीआर कॉल मिलने पर एक टीम को नेहरू विहार की गली नंबर 2 में भेजा गया, जहा पड़ोसी के घर में नौ साल की बच्ची का शव सूटकेस में बंद मिला। पुलिस को शुरुआती मेडिकल जांच के आधार पर यौन उत्पीड़न का संदेह है।
जिसमें पाया गया कि लड़की के पिता ने उसे पहले ही लड़की को जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में भर्ती करा दिया था। अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने उसके चेहरे पर चोट के निशान पाए और यौन उत्पीड़न की संभावना जताई है।
(POCSO) अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी की तलाश जारी है ।
दिल्ली महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित महानगरों में से एक बन चुका है। दुष्कर्म, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और मानव तस्करी जैसे अपराधों की संख्या चिंताजनक है। निर्भया कांड (2012) के बाद देशभर में जागरूकता तो बढ़ी, लेकिन अपराध दर में गिरावट नहीं आई।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर दिन औसतन तीन बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं, जो इसे देश के सबसे असुरक्षित महानगरों में से एक बनाते हैं ।
