DB l सिर्फ पायलट की गलती कहना दुर्भाग्यपूर्ण- सुप्रीम कोर्ट l
सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया AI-171 विमान हादसे को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस घटना को महज ‘पायलट की गलती’ करार देना गैरजिम्मेदाराना और दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, DGCA और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) से जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें दावा किया गया था कि हादसा पायलटों की ईंधन सप्लाई बंद करने की वजह से हुआ। अदालत ने कहा, “जांच पूरी होने से पहले ऐसी खबरें प्रकाशित करना बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना है।”

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कॉकपिट बातचीत के आधार पर पायलटों को दोषी ठहराने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जबकि पायलट बेहद अनुभवी थे और हादसे की सच्चाई अभी सामने नहीं आई।
12 जून 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरने के तुरंत बाद एयर इंडिया का बोइंग 787-8 विमान क्रैश हो गया था। इस हादसे में करीब 270 लोगों की मौत हुई, जिनमें 19 लोग जमीन पर मौजूद थे। मृतकों में भारतीयों के अलावा ब्रिटिश, पुर्तगाली और कनाडाई नागरिक भी शामिल थे।
भूषण ने कहा कि हादसे को हुए 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक केवल प्रारंभिक रिपोर्ट आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि DGCA खुद इस मामले में जिम्मेदार हो सकती है, क्योंकि जांच टीम में इसके ही अधिकारी शामिल हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले डिटेल्स सार्वजनिक करना गलत है। अगर बाद में पायलट क्लीन चिट पा जाएं तो परिवारों पर क्या गुज़रेगी?”

उन्होंने साफ किया कि गोपनीयता और पारदर्शिता के बीच संतुलन जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि जल्दबाजी में दी गई अधूरी जानकारी से न केवल परिवारों को आघात पहुंचेगा बल्कि विमानन सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा। सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन नामक NGO की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने AAIB की रिपोर्ट पर सवाल उठाए। इस रिपोर्ट में ‘फ्यूल कटऑफ’ को हादसे का कारण बताया गया था, जिसे अदालत ने “अपर्याप्त और गैरजिम्मेदाराना” करार दिया।
भूषण ने कोर्ट से मांग की कि फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) को स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा जांचा जाए। उनका कहना है कि बिना पारदर्शी रिपोर्ट के यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और DGCA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने साफ किया कि हादसे की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
