जबलपुर । सड़कों पर भरा पानी, सीवर में फंसी ज़िंदगी, कई वार्डों में हफ्ते से कचरा गाड़ी नहीं पहुंची आधा शहर गंदगी और जलभराव की समस्या से जूझ रहा है– जबलपुर की जनता बेहाल।
जबलपुर के नागरिक अब पूछ रहे हैं – “इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?”
जबलपुर शहर में इन दिनों स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और सीवरेज निर्माण कार्यों के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार हो रही बारिश ने शहर की सड़कों की पोल खोल दी है। जगह-जगह जलभराव, खुले गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य अब दुर्घटनाओं का कारण बनते जा रहे हैं।
शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है। जबलपुर के कई प्रमुख और घनी आबादी वाले वार्डों में पिछले एक सप्ताह से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाहन नहीं पहुंचे, जिससे नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विजय नगर, गोरखपुर, सिविक सेंटर, रामपुर, रांझी, और शक्ति नगर जैसे क्षेत्रों में घरों का कचरा अब सड़कों पर फेंका जा रहा है। इससे गलियों में बदबू, मच्छरों और गंदगी का अंबार लग गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी नगर निगम की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्मार्ट सिटी मिशन वाले शहर में अगर एक हफ्ते तक कचरा गाड़ियां न पहुंचें, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक विफलता है।
गढ़ा, अधारताल, भानतलैया, रांझी, विजय नगर, मदन महल और अन्य क्षेत्रों में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों की बसें और ऑटो चालकों को सड़कों में छिपे गड्ढों की वजह से जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। कई स्थानों पर वाहनों के पलटने की घटनाएं हो चुकी हैं। सीवर लाइन बिछाने और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत महीनों से चल रहे कार्य अब जनता के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। कई क्षेत्रों में सड़कें खुदी पड़ी हैं और निर्माण अधूरा है, जिससे लोगों को ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं से रोज़ दो-चार होना पड़ रहा है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर जनता का सीधा आरोप है कि वे केवल उद्घाटन और भूमि पूजन में दिखते हैं, नेता और अधिकारी मौन है , फोटो खिंचवाने तक सीमित है। मगर जब जवाबदेही की बात आती है तो कोई सामने नहीं आता। नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, और कलेक्टर व कमिश्नर के पास शिकायतें अब केवल खानापूर्ति बनकर रह गई हैं।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया:
“अब जनता को घोषणाएं नहीं, समाधान चाहिए। पहले सड़कें और सीवर दुरुस्त करें, फिर स्मार्ट सिटी की बात करें।”
“हमारे बच्चों की जान खतरे में है। हर सुबह डर के साथ स्कूल भेजते हैं। क्या यही विकास है?”
सीएम हेल्पलाइन भी ‘मैनेज’ होने लगी?
कई नागरिकों ने दावा किया है कि अब सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने पर भी कुछ नहीं होता। अधिकारी शिकायतों को ऊपर पहुँचने ही नहीं देते। ऐसी स्थिति में जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
जनता की मांग:
• जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल ड्रेनेज व्यवस्था।
• अधूरे निर्माण कार्यों की समय-सीमा तय कर जल्द पूरा किया जाए।
• सड़क मरम्मत और पैचवर्क कार्य बारिश से पहले कराए जाएं।
• प्रशासनिक जवाबदेही तय हो – जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।
“डिजिटल भारत न्यूज़” इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से अपील करता है कि जबलपुर की जनता की आवाज़ को सुना जाए और शीघ्र ठोस कार्रवाई हो।
