Vande_Bharat_Express
DB l क्या फ़ूड लाइसेंस देकर भूल गया सिस्टम ?…
देश की प्रीमियम ट्रेनों में गिनी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर खाने की गुणवत्ता को लेकर विवादों में है। ताजा मामलों ने न सिर्फ IRCTC बल्कि पूरी रेलवे व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अहमदाबाद से मुंबई जा रही वंदे भारत ट्रेन में एक यात्री को परोसी गई दाल में कीड़ा मिलने का मामला सामने आया। सोशल मीडिया पर शिकायत और सबूत सामने आते ही IRCTC ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वेंडर कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और उसका कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया। किचन को सील कर डीप क्लीनिंग और पेस्ट कंट्रोल की प्रक्रिया शुरू की गई।

वहीं, एक अन्य मामले में वाराणसी से देवघर जा रही वंदे भारत ट्रेन में एक महिला यात्री ने आरोप लगाया कि खाना खाने के बाद उन्हें गंभीर एलर्जी हो गई और उनके छोटे बेटे को दस्त की शिकायत हुई। मेडिकल रिपोर्ट और तस्वीरों के सामने आने के बाद यह मामला भी सुर्खियों में आ गया। हालांकि IRCTC ने सफाई देते हुए कहा कि खाना जांच में सुरक्षित पाया गया, लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर खाना सुरक्षित था, तो यात्री बीमार कैसे हुए?

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एक बड़ी समस्या की ओर इशारा किया है—क्या रेलवे सिर्फ वेंडर को लाइसेंस देकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है? ट्रेनों में परोसे जाने वाले खाने की नियमित और सख्त जांच आखिर कौन करता है?
जानकारों का मानना है कि फूड सेफ्टी के मानकों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। Food Safety and Standards Authority of India के नियमों के बावजूद अगर इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो साफ है कि निगरानी में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है।
यात्रियों का कहना है कि जब वे प्रीमियम किराया देकर सफर करते हैं, तो उन्हें सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना चाहिए। बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आना रेलवे की साख पर भी सवाल खड़े करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सख्त कार्रवाई केवल घटनाओं के बाद ही होगी, या सिस्टम में सुधार कर पहले ही ऐसी लापरवाही को रोका जाएगा?
