DB l मध्य प्रदेश, जिसे देश में ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में गौरव हासिल है, आज बाघों की लगातार हो रही मौतों से चिंता के केंद्र में आ गया है। वर्ष 2022 की गणना के अनुसार यहां 785 बाघ मौजूद हैं, लेकिन 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 18 बाघों की मौत ने इस गौरव पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

7 जनवरी से 6 अप्रैल के बीच हुई ये मौतें कुल बाघ आबादी का करीब 2.30% हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। इससे साफ है कि प्रदेश में हालात सामान्य नहीं हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई मामलों में बाघों के शव कई दिनों बाद मिल रहे हैं। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में एक बाघ का शव 23 दिन बाद मिला, जबकि कान्हा टाइगर रिजर्व और उमरिया जैसे इलाकों में भी ऐसी ही लापरवाही सामने आई है।
इन मौतों के पीछे शिकार, करंट और अन्य मानवजनित कारण प्रमुख रूप से सामने आए हैं। छिंदवाड़ा में रेडियो कॉलर लगे बाघ का शिकार और उमरिया में करंट से हुई मौतें यह बताती हैं कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी कमी है।

इसी बीच नर्मदापुरम स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में चार माह के बाघ शावक का शव मिलने से हालात और गंभीर हो गए हैं। शरीर पर गहरे घाव और पगमार्क से यह मामला आपसी संघर्ष का माना जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सख्त निगरानी, बेहतर गश्त और अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो ‘टाइगर स्टेट’ का यह गौरव खतरे में पड़ सकता है। अब वक्त है कि दावों से आगे बढ़कर जमीन पर ठोस कार्रवाई की जाए।
