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DB l दिल्ली फिर घुटी जहरीली हवा में! सख्त नियमों के बावजूद धूल-धुआं हर ओर, दोहराई हर साल वही कहानी…

दिल्ली-एनसीआर में दीपावली के बाद एक बार फिर वायु प्रदूषण का स्तर चरम पर पहुंच गया है। राजधानी की हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ गई हैं। बुधवार सुबह दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 के पार दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वजीरपुर का AQI 405, रोहिणी का 383 और आनंद विहार का 364 रहा।

चौंकाने वाली बात यह रही कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म IQAir के आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिला। जहां CPCB के मॉनिटर दिल्ली का AQI 400 से नीचे दिखा रहे थे, वहीं IQAir ने वही क्षेत्र 2000 से ऊपर दर्ज किया। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों डेटा तकनीकी रूप से सही हैं, पर मापने की पद्धति अलग है — CPCB रेफरेंस ग्रेड मॉनिटर से डेटा लेता है जबकि IQAir सेंसर-आधारित एल्गोरिद्म पर चलता है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी के अनुसार, “दीपावली के बाद पटाखों से प्रदूषण का पहला बड़ा स्मॉग एपिसोड सामने आया है। दिल्ली की हवा में PM2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही नीतिगत कमजोरी का नतीजा है।

दिल्ली सरकार और नगर निकायों ने इस बार भी कई कदम उठाने का दावा किया है। एनडीएमसी ने दिसंबर तक 13 नई रोड स्वीपिंग मशीनें और सात एंटी-स्मॉग गन लगाने की घोषणा की है। लोधी रोड पर मिस्ट स्प्रे का ट्रायल चल रहा है, जबकि खान मार्केट और कनॉट प्लेस जैसे बाजारों में रात्रिकालीन सफाई की जा रही है।

फिर भी, हर साल वही हालात दोहराए जा रहे हैं — सर्दी की शुरुआत के साथ दिल्ली की हवा धुंध में घुल जाती है, और लोग सांस लेने को मजबूर हो जाते हैं। लाखों खर्च और सैकड़ों नियमों के बावजूद सड़कें धूल में लिपटी हैं, वाहन धुआं उगल रहे हैं और खेतों की पराली का धुआं राजधानी तक पहुंच रहा है।

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