DB l सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2006 के चर्चित निठारी सीरियल किलिंग केस के अंतिम बचे मामले में भी दोषी सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया और उसकी सजा को रद्द कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कोली की ओर से दायर क्युरेटिव याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।
कोली ने यह याचिका 2011 के उस फैसले के खिलाफ दायर की थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा था। उसने तर्क दिया था कि जिन सबूतों के आधार पर उसे इस मामले में दोषी ठहराया गया था, वही साक्ष्य अन्य मामलों में अविश्वसनीय पाए गए और उन्हीं साक्ष्यों पर उसे पहले बरी किया जा चुका है। अदालत ने माना कि एक ही प्रकार के सबूतों के आधार पर अलग-अलग निर्णय देना न्यायिक असंगति होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी 2011 के अपने पुराने आदेश और 28 अक्टूबर 2014 के पुनर्विचार याचिका खारिज करने वाले आदेश को भी रद्द कर दिया। साथ ही, 13 फरवरी 2009 के सेशन कोर्ट और 11 अक्टूबर 2009 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसलों को निरस्त करते हुए कोली को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
गौरतलब है कि निठारी कांड 2006 में तब सामने आया था जब नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पास एक नाले से बच्चों और युवतियों के कंकाल बरामद हुए थे। जांच में पंधेर के नौकर सुरेंद्र कोली पर हत्या, दुष्कर्म और नरभक्षण जैसे गंभीर आरोप लगे थे। कोली को 16 मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई थी, पर बाद में कई मामलों में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें कोली और पंधेर को 14 मामलों में बरी किया गया था। आज के फैसले के साथ, निठारी कांड से जुड़े सभी मामलों में सुरेंद्र कोली अब पूरी तरह बरी हो गया है।
