DB । संसद का मॉनसून सत्र सोमवार को तीखे टकराव के साथ शुरू हुआ। पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्ष ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कथित सीजफायर को लेकर किए गए दावे पर सरकार से जवाब मांगा। इन मुद्दों पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जोरदार हंगामा हुआ, जिससे कार्यवाही बाधित हुई।
इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, सदन में रक्षा मंत्री को बोलने दिया जाता है, सत्ता पक्ष के नेताओं को पूरा मौका मिलता है, लेकिन जैसे ही विपक्ष कुछ कहना चाहता है, हमें अनुमति नहीं दी जाती। मैं नेता प्रतिपक्ष हूं और मेरा अधिकार है कि मैं देश के मुद्दों पर बोलूं, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया जाता। यह सत्ता पक्ष की एक नई कार्यप्रणाली है।
राहुल गांधी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताते हुए कहा कि संसद जनता की आवाज है और हर सांसद को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में बहस और चर्चा की बजाय एकतरफा रवैया अपनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार इन गंभीर मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं देती, वे संसद में विरोध जारी रखेंगे। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष सिर्फ हंगामे की राजनीति कर रहा है और सार्थक बहस से बच रहा है। सत्र के पहले ही दिन जिस तरह की नोक झोक दिखी, उससे आने वाले दिनों में और अधिक सियासी तापमान बढ़ने की संभावना है।
