DB l मध्य पूर्व में तनाव के बीच ईरान और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच शांति वार्ता फिलहाल ठप होती नजर आ रही है। दूसरे दौर की बातचीत के संकेत नहीं मिलने के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची लगातार कूटनीतिक दौरों में व्यस्त हैं। वह हाल ही में दो बार पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शेहबाज़ शरीफ से मुलाकात की।
इसके अलावा अराग़ची ने Oman का दौरा कर सुल्तान हैथम बिन तारिक से बातचीत की, जहां क्षेत्रीय तनाव कम करने और मध्यस्थता प्रयासों पर चर्चा हुई। उन्होंने क़तर और साउदी अरेबिया के विदेश मंत्रियों से भी संपर्क कर अपने कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी दी।
खाड़ी देशों की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में अहम बनी हुई है। जहां साउदी अरेबिया को ईरान के प्रति अपेक्षाकृत सख्त रुख रखने वाला देश माना जाता है, वहीं ओमान को हमेशा से नरम और मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला देश समझा जाता है। क़तर भी संतुलित रुख अपनाते हुए संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश करता रहा है।

इस बीच ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू करने के लिए तीन-चरणीय प्रस्ताव रखा है। पहले चरण में युद्ध समाप्त करने और भविष्य में लेबनान सहित क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने की गारंटी मांगी गई है। दूसरे चरण में वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ हौर्मुज़ के प्रबंधन पर चर्चा का प्रस्ताव है। तीसरे चरण में ही ईरान परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार होगा।
अमेरिका की ओर से वाइट हाउस ने इस प्रस्ताव पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। वहीं पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि बातचीत के लिए जटिल कूटनीतिक दौरों की जरूरत नहीं है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है। ईरान ने जहां पहले भरोसा बहाल करने की शर्त रखी है, वहीं अमेरिका परमाणु हथियारों के मुद्दे पर सख्त रुख बनाए हुए है। ऐसे में शांति वार्ता की राह अभी भी मुश्किल नजर आ रही है और मध्य पूर्व में स्थायी समाधान की उम्मीद फिलहाल दूर दिखाई दे रही है।
