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DB l इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैकक्ले इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। यह डील सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस समझौते के साथ न्यूजीलैंड ‘फाइव आइज’ समूह का तीसरा ऐसा देश बन जाएगा, जिसने हाल के वर्षों में भारत के साथ ट्रेड डील की है। इससे पहले भारत ऑस्ट्रेलिया (2022) और यूनाइटेड किंगडम (2025) के साथ समझौते कर चुका है। ‘फाइव आइज’ एक खुफिया साझेदारी समूह है, जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन इन देशों के साथ तेजी से आर्थिक रिश्ते मजबूत कर रहा है।

FTA के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले लगभग 70% उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म होगा, जिससे कपड़ा, दवाएं, इंजीनियरिंग सामान, आईटी और खाद्य उत्पादों को बड़ा फायदा मिलेगा। साथ ही भारतीय पेशेवरों को हर साल 5000 अस्थायी वीजा मिलेंगे, जिससे आईटी, हेल्थकेयर, शिक्षा और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अवसर बढ़ेंगे।

वहीं न्यूजीलैंड को भारत में अपने 95% उत्पादों पर शुल्क में राहत मिलेगी। इनमें ऊन, लकड़ी, वाइन और फल जैसे उत्पाद शामिल हैं। हालांकि भारत ने डेयरी और कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि घरेलू उद्योग सुरक्षित रह सकें।

रणनीतिक रूप से यह समझौता दर्शाता है कि भारत बिना किसी औपचारिक गठबंधन का हिस्सा बने, विकसित लोकतांत्रिक देशों के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी मजबूत कर रहा है। छोटे लेकिन उन्नत बाजारों के साथ ऐसे समझौते भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति दिला सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में भारत यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा के साथ भी समझौते करता है, तो ‘फाइव आइज’ के सभी देशों के साथ उसका आर्थिक नेटवर्क तैयार हो जाएगा। यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम साबित हो सकता है।

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