DB l पियूष गोयल ने राइजिंग भारत समिट 2026 में कहा कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते में जरूरत पड़ने पर “री-बैलेंस” किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अमेरिकी टैरिफ पर आए हालिया घटनाक्रम के बाद “रुको और इंतजार करो” की रणनीति पर है, लेकिन भारत के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
गोयल ने बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत विभिन्न स्तरों पर जारी है और संयुक्त बयान में भी परिस्थितियां बदलने पर समझौते को संतुलित करने की गुंजाइश रखी गई है। उन्होंने कहा कि डेयरी, मक्का, सोयाबीन और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को डील से छूट दी गई है तथा भारत में किसी भी तरह का GM फूड प्रवेश नहीं करेगा। किसानों, डेयरी सेक्टर, MSMEs और मछुआरों के हित सुरक्षित रखे गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ और बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति में बदलाव आया है। पहले भारत पर 50 प्रतिशत तक प्रभावी टैरिफ का दबाव था, हालांकि रूस से तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को 7 फरवरी 2026 से हटा दिया गया है।
गोयल ने कहा कि व्यापार समझौते का आकलन केवल टैरिफ दर से नहीं, बल्कि उसके व्यापक लाभों से किया जाना चाहिए। यदि टैरिफ 18 प्रतिशत के बजाय 15 प्रतिशत होता है, तो निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। लेदर, टेक्सटाइल, डायमंड, फार्मा और स्मार्टफोन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
उन्होंने भरोसा जताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का निर्यात इस वर्ष पिछले साल से अधिक रहेगा। भारत और अमेरिका के मुख्य वार्ताकारों की प्रस्तावित बैठक पुनर्निर्धारित की गई है और नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
