DB l इथियोपिया में 12,000 साल बाद फटे हेली गुब्बी ज्वालामुखी की राख भारत तक पहुंच गई है। तेज जेट स्ट्रीम हवाओं की वजह से राख का विशाल बादल लाल सागर, यमन, ओमान और अरब सागर को पार करते हुए भारत के पश्चिमी और उत्तरी राज्यों में दाखिल हो गया। राख का यह गुबार 10–15 किलोमीटर की ऊंचाई पर उठा और 25,000 से 45,000 फीट तक फैलते हुए दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा की ऊपरी हवा में देखा गया।
ज्वालामुखी की राख फ्लाइट ऑपरेशंस के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि बारीक कण जेट इंजनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पर सात इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं, जबकि 10 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी हुई। एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर और KLM जैसी कई एयरलाइंस ने खाड़ी देशों से आने-जाने वाली उड़ानों को एडवाइजरी के आधार पर रद्द किया है। DGCA ने सभी एयरलाइनों से राख वाले एयरस्पेस से बचने और रूट बदलकर उड़ान भरने के निर्देश दिए हैं।
IMD ने बताया कि राख का यह बादल 100–120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भारत के ऊपर से गुजर रहा है और तेजी से कमजोर हो रहा है। राख की ऊंचाई बहुत ज्यादा होने के कारण इसका दिल्ली और एनसीआर की जमीनी हवा की गुणवत्ता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। हवा पहले से ही प्रदूषित है, लेकिन ज्वालामुखीय राख के कारण AQI में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। हालांकि ऊंचाई वाली लेयर में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड नेपाल, हिमालय और यूपी के तराई क्षेत्रों पर हल्का असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार ज्वालामुखी की राख में आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर, जिंक और निकिल जैसे कई खनिज होते हैं, लेकिन इनमें रोडियम भी मौजूद हो सकता है जिसकी कीमत सोने से दोगुनी होती है। हालांकि राख में ये धातुएं मिश्रित रूप में होती हैं, इसलिए इन्हें निकालना बेहद कठिन और महंगा होता है। राख के खतरनाक तत्व—आर्सेनिक, कैडमियम, लेड और मर्करी—मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह माने जाते हैं, लेकिन भारत में राख जमीन तक नहीं पहुंची है, इसलिए सामान्य लोगों पर जोखिम बहुत कम है।
IMD के अनुसार यह राख का बादल मंगलवार शाम तक भारत से बाहर निकल जाएगा। हालांकि तब तक फ्लाइट रूट और शेड्यूल पर असर बना रहेगा। एयरपोर्ट अधिकारियों ने यात्रियों से एयरलाइन की ताज़ा अपडेट लगातार चेक करने की अपील की है।
