DB l देश के प्रमुख उद्योगपति और वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में वेदांता समूह के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी ने दिल्ली और मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की।
जानकारी के अनुसार, ईडी की यह कार्रवाई उन लेन-देन की जांच का हिस्सा है, जिनमें समूह की कुछ कंपनियों द्वारा मूल कंपनी को ब्रांड शुल्क (Brand Fee) भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये भुगतान विदेशी मुद्रा नियमों के अनुरूप थे या नहीं। तलाशी अभियान सोमवार से शुरू हुआ और बाद में पूरा कर लिया गया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब वेदांता लिमिटेड अपने बहुचर्चित डीमर्जर प्लान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इस योजना के तहत कंपनी को पांच स्वतंत्र इकाइयों में विभाजित किया जाना है। समूह को हाल ही में अपने सुरक्षित लेनदारों से इस योजना के लिए मंजूरी भी प्राप्त हुई थी।
वेदांता समूह ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कंपनी ने दोहराया कि वह सभी लागू कानूनों और नियामकीय प्रावधानों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि वेदांता समूह पहले भी विभिन्न नियामकीय और प्रशासनिक विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। फिलहाल ईडी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।
