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DB l नई दिल्ली में 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का औपचारिक उद्घाटन कर देश के प्रशासनिक ढांचे को एक नए दौर में प्रवेश कराया। लगभग 92–95 वर्षों तक सत्ता का केंद्र रहे नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक अब ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखे जाएंगे। ब्रिटिश काल में आर्किटेक्ट हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन की गई सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में शुक्रवार को आखिरी आधिकारिक बैठक हुई।

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क्या है ‘सेवा तीर्थ’ में खास?

‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को पहली बार एक ही परिसर में समेकित किया गया है। पहले ये अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे, जिससे समन्वय में दिक्कतें आती थीं। अब डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, केंद्रीकृत स्वागत व्यवस्था, सुव्यवस्थित पब्लिक इंटरैक्शन एरिया और स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम जैसी सुविधाएं प्रशासन को अधिक कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाती हैं।

कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा और सूचना-प्रसारण जैसे प्रमुख मंत्रालयों को स्थान दिया गया है। व्यापक निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी आधुनिक मानकों के अनुरूप है। यह पूरा परिसर विजय चौक के पास विकसित किया गया है और इसे बनाने में लगभग 1,189 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

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नॉर्थ-साउथ ब्लॉक से कितना अलग?

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतर सिर्फ वास्तुकला का नहीं बल्कि “वर्क कल्चर” का भी है। जहां पुरानी इमारतें औपनिवेशिक जरूरतों के मुताबिक बनी थीं, वहीं नया परिसर आधुनिक, तकनीक-समर्थ और भविष्य उन्मुख प्रशासन के लिए डिजाइन किया गया है। बिखरे हुए कार्यालयों को एक कैंपस में लाने से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और रखरखाव लागत भी घटेगी।

उद्घाटन के साथ बड़े फैसले

‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होते ही प्रधानमंत्री ने कई अहम घोषणाएं कीं। PM RAHAT योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज, ‘लखपति दीदी’ लक्ष्य को 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करना, कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को 2 लाख करोड़ रुपये तक विस्तार और 10,000 करोड़ के कॉर्पस के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी शामिल है।

इस बदलाव को केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन के दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है—जहां दक्षता, सुरक्षा और नागरिक भागीदारी को केंद्र में रखा गया है।

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