DB l केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित रेयर अर्थ कॉरिडोर भारत की रणनीतिक और आर्थिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बदलते वैश्विक हालात, सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों और चीन की बढ़ती पकड़ के बीच यह पहल भारत को आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए विदेशों, खासकर चीन, पर निर्भरता कम करना और देश के भीतर मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टर्बाइन, स्मार्टफोन, बैटरी स्टोरेज, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, एयरोस्पेस, डिफेंस और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स में बड़े पैमाने पर होता है। वर्तमान में चीन इस सेक्टर का सबसे बड़ा सप्लायर है और वैश्विक सप्लाई पर उसकी मजबूत पकड़ रही है। हाल के वर्षों में चीन द्वारा सप्लाई सीमित करने के संकेतों ने दुनिया भर को वैकल्पिक स्रोतों पर सोचने के लिए मजबूर किया है।

रेयर अर्थ कॉरिडोर के तहत ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को जोड़ते हुए एक विशेष नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसका मकसद माइनिंग, प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्टेशन को एकीकृत करना है, ताकि कच्चे माल से लेकर हाई-प्योरिटी रेयर अर्थ एलिमेंट्स तक की पूरी वैल्यू चेन देश में ही विकसित हो सके। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि क्लीन मोबिलिटी, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और नई टेक्नोलॉजी को भी मजबूती मिलेगी।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस कॉरिडोर से भारत की प्रोडक्शन कैपेसिटी में बड़ा इजाफा होगा। घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग बढ़ने से लागत कम होगी, इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, डिफेंस और स्ट्रैटेजिक सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
रेयर अर्थ मिनरल्स की प्रोसेसिंग एक जटिल प्रक्रिया है। सबसे पहले जियोलॉजिकल सर्वे के जरिए खनिजों की पहचान की जाती है। इसके बाद माइनिंग, क्रशिंग, पाउडर बनाना, केमिकल सॉल्यूशन से एलिमेंट्स को अलग करना और अंत में रिफाइनिंग कर हाई प्योरिटी हासिल की जाती है। सरकार का फोकस इसी पूरी प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक के साथ देश में विकसित करने पर है।
कुल मिलाकर, रेयर अर्थ कॉरिडोर भारत को तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक रूप से “डबल पावर” देने वाला कदम साबित हो सकता है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।
