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DB l भारत की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो इन दिनों अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। 2 से 4 दिसंबर के बीच 400 से ज़्यादा उड़ानें रद्द और सैकड़ों में कई-कई घंटे की देरी से देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में यात्री 12–14 घंटे तक फंसे रहे और किसी को यह भी नहीं पता था कि उनकी फ्लाइट कब उड़ेगी।

नए FDTL (Flight Duty Time Limitation) नियमों के लागू होने के बाद पायलटों और क्रू के लिए आराम का समय बढ़ा दिया गया है। इसी कारण इंडिगो को स्टाफ की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे रोस्टर मैनेजमेंट पूरी तरह गड़बड़ा गया। रॉयटर्स और एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक यह संकट अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा साबित हुआ।

हवाई अड्डों पर हंगामा: यात्रियों का कहना है कि उन्हें एयरपोर्ट पर बस “1 घंटे बाद बताएंगे” कहकर बैठा दिया गया। हैदराबाद एयरपोर्ट पर एक यात्री 15 घंटे से बैठा रहा, जबकि दिल्ली और मुंबई में बोर्डिंग गेट लगातार बदले जा रहे थे। कई यात्रियों ने नाराज़ होकर कहा कि “ना सही जानकारी मिल रही है, ना फ्लाइट मिल रही है।”

दूसरी एयरलाइन के टिकट आसमान पर : इंडिगो की फ्लाइटें कैंसल होने के बाद अन्य एयरलाइनों ने किराया बढ़ा दिया।

  • दिल्ली–कोलकाता टिकट: ₹38,000 तक
  • नागपुर की यात्री को इंडिगो का ₹5,000 का टिकट रद्द होने के बाद ₹22,000 में नया टिकट लेना पड़ा।

DGCA की कड़ी निगरानी : डीजीसीए ने इंडिगो से तुरंत रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि यात्रियों को रीबुकिंग या पूरा रिफंड दिया जाए। अक्टूबर में इंडिगो की OTP 84% थी, जो अब 20% तक गिर चुकी है — जो कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ी गिरावट है।इंडिगो ने बयान जारी कर कहा कि “48 घंटों में स्थिति सामान्य करने की कोशिश जारी है।”

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