DB l डॉक्टरों और खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि नाले के पानी से सिंचाई की गई सब्जियाँ—लिवर को नुकसान, किडनी डैमेज, पेट के कैंसर, हार्मोन संबंधी दिक्कतों का खतरा बढ़ाती हैं।
शीतकाल का मौसम सब्जियों का सीज़न माना जाता है—पालक, मेथी, गोभी, बंदगोभी और लौकी की मांग इन दिनों चरम पर होती है। लेकिन इसी बीच एक चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा सामने आया है। शहर के VIP इलाकों और बड़े बाजारों में बिकने वाली सब्जियों की खेती गंदे नाले के पानी से की जा रही है, जिससे इनकी हर पत्ती में ज़हर घुलने का खतरा बढ़ गया है। हाईकोर्ट के सख़्त निर्देश के बाद फूड सेफ्टी विभाग ने इन सब्जियों के सैंपल उठाकर भोपाल लैब भेजे हैं, ताकि साफ़ हो सके कि आखिर ये सब्जियाँ कितनी दूषित हैं।

कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स पर सुओ-मोटो संज्ञान लेते हुए पाया कि किसानों द्वारा खेतों की सिंचाई के लिए नालों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नाले का पानी सीधे सीवेज और केमिकल वेस्ट से भरा होता है, जो मिट्टी के ज़रिए सब्जियों में घुलकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों तक का खतरा बढ़ाता है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि यह मुद्दा सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा हमला है।
जबलपुर नगर निगम तुरंत एक्शन में आया और नालों पर लगी मोटरों को हटवाया। फूड सेफ्टी विभाग ने बाजारों—खासकर गोहलपुर और अन्य बड़ी मंडियों से—पालक, मेथी, गोभी, बंदगोभी और लौकी के नमूने लिए हैं।फूड सेफ्टी अधिकारियों के अनुसार, सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि नाले का गंदा पानी सब्जियों में भारी धातुओं (Heavy Metals), कीटाणुओं और जहरीले तत्वों की मात्रा कितनी बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की बड़ी कार्रवाई संभव है।

साथ ही किसानों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे नाले के पानी का इस्तेमाल न करें। जहां-जहां नालों से सीधे पाइप फसल तक जा रहे थे, उन सभी को हटाया जा रहा है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं—हाईकोर्ट ने नर्मदा और हिरन नदी में untreated सीवेज मिलने पर भी गहरा असंतोष जताया है। शहर से रोज़ाना 174 MLD सीवेज निकलता है, लेकिन 13 STP होने के बावजूद सिर्फ 58 MLD पानी ट्रीट हो रहा है। बाकी सारा गंदा पानी नर्मदा में जा रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कलेक्टर से अगली सुनवाई (18 दिसंबर 2025) से पहले विस्तृत हलफनामा मांगा है।
