DB l SIR (Standard Operating Procedure for Electoral Roll Verification) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में मंगलवार को काफ़ी तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। विपक्ष पहले से देशभर में इसका विरोध कर रहा है, वहीं अदालत में भी इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणियाँ सामने आईं। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा चुनाव आयोग (EC) को ‘तानाशाह’ कहने पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच भड़क उठी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भूषण को चेतावनी देते हुए कहा कि वे राजनीतिक पार्टियों की तरह बयानबाज़ी न करें और केवल कानूनी मुद्दों पर ही दलीलें दें।

प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि देशभर में वोटर लिस्ट को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया पहले कभी इस तरह नहीं हुई और यह Representation of the People Act का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी दावा किया कि तेज़ी से काम करवाने के दबाव में BLOs पर भारी मानसिक और शारीरिक दबाव पड़ा है, जिससे 30 BLOs आत्महत्या कर चुके हैं। भूषण ने कहा कि कई लोग EC को तानाशाह इसलिए मानते हैं क्योंकि आयोग मनमाने तरीके से फैसले करता है। इस पर बेंच ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों की टिप्पणियों को आधार बनाकर अदालत में बड़े आरोप न लगाएँ और अपनी दलीलें याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों तक ही सीमित रखें।
भूषण ने यह भी कहा कि SIR, EC द्वारा नागरिकता सत्यापन के एक बड़े ‘गेम प्लान’ का हिस्सा है, जबकि नागरिकता तय करना गृह मंत्रालय का विषय है और EC की इस भूमिका पर सवाल उठाया। इससे पहले अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में SIR के दौरान BLOs पर हमले और डराने-धमकाने की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने मांग की थी कि वोटर लिस्ट को सुरक्षित तरीके से तैयार कराने के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि EC और संबंधित एजेंसियाँ कानून के तहत उचित कदम उठाने में सक्षम हैं। बता दें कि SIR के खिलाफ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका पर ही यह सुनवाई चल रही है, जिसमें प्रशांत भूषण पक्ष रख रहे हैं।
