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DB l विजयदशमी के अवसर पर भुज एयरबेस से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सर क्रीक विवाद पर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान ने कोई हिमाकत की, तो उसे ऐसा करारा जवाब मिलेगा कि “इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे।” उन्होंने 1965 के युद्ध और 1971 में कराची पर भारतीय नौसेना के हमले का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को पुराने सबक याद दिलाए।

क्या है सर क्रीक विवाद?

सर क्रीक गुजरात के कच्छ और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच स्थित 96 किलोमीटर लंबी जलधारा है। सामरिक दृष्टि से यह इलाका बेहद अहम है क्योंकि यहां से कराची पोर्ट तक पहुंचने का मार्ग है और समुद्र में हाइड्रोकार्बन व गैस के भंडार की संभावना है।
1914 के ब्रिटिश समझौते को लेकर विवाद की नींव पड़ी। भारत का कहना है कि सीमा मध्य रेखा (थलवेग सिद्धांत) से गुजरती है, जबकि पाकिस्तान इसे पूर्वी तट मानता है। यही मतभेद दशकों से विवाद का कारण बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से पाकिस्तान ने सर क्रीक क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। उसने क्रीक बटालियन, तटीय रक्षा नौकाएं और राडार सिस्टम तैनात किए हैं। वहीं, भारत ने 2008 के मुंबई हमलों के बाद इस इलाके में चौकसी बढ़ा दी। बीएसएफ ने कई संदिग्ध नावें जब्त कीं और सुरक्षा व्यवस्थाएं कड़ी कीं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की नीयत साफ नहीं है। उसने सर क्रीक के पास मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर दिया है, जिससे उसकी मंशा उजागर होती है। राजनाथ ने कहा, “1965 की जंग में हमारी सेना लाहौर तक पहुंची थी। आज पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची का रास्ता सर क्रीक से होकर गुजरता है।”
उन्होंने साफ कहा कि भारतीय सेना और बीएसएफ सरहद की रक्षा पूरी मुस्तैदी से कर रहे हैं और पाकिस्तान की किसी भी हिमाकत का निर्णायक जवाब देंगे।

राजनाथ सिंह के बयान के मायने और गहरे हैं क्योंकि 1971 की जंग में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत कराची पोर्ट को तबाह कर दिया था। INS निर्घात, INS निपट और INS वीर जैसी मिसाइल बोट्स ने पाकिस्तानी नौसेना के जहाज PNS खैबर और PNS मुहाफिज को डुबो दिया था। उस समय कराची का तेल डिपो और नौसैनिक अड्डा जलकर खाक हो गया था।

सर क्रीक विवाद केवल जमीन का नहीं बल्कि मनी, मैप और मैरीटाइम डॉमिनेंस का सवाल है। यहां विशाल मछली संसाधन और संभावित तेल-गैस भंडार हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र समुद्री सीमाओं और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (EEZ) के निर्धारण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राजनाथ सिंह का बयान पाकिस्तान के लिए साफ संदेश है कि अब भारत केवल बातचीत पर निर्भर नहीं रहेगा। यदि पाकिस्तान ने सर क्रीक में कोई दुस्साहस किया, तो भारत का जवाब इतिहास और भूगोल दोनों को बदल सकता है।

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