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DB l जबलपुर में नवरात्र का उत्साह इस बार कई परिवारों के लिए मातम में बदल गया है। शहरभर में सजाए गए करीब 800 दुर्गा पंडालों में से 675 पंडाल अवैध और लापरवाह बिजली कनेक्शन पर चल रहे हैं। नतीजा – चार दिनों के भीतर करंट लगने से तीन मौतें और कई घायल। बरगी हिल्स में दो मासूम बच्चे आयुष और वेद करंट की चपेट में आकर दम तोड़ बैठे, वहीं गढ़ा शारदा चौक में पंडाल सजाने के दौरान हाईटेंशन लाइन से टकराने पर 27 वर्षीय युवक शिवम ठाकुर की जान चली गई और उसका साथी गंभीर रूप से झुलस गया।

सबसे बड़ा सवाल है – जब अस्थाई कनेक्शन लेना ही नियम है, तो बिजली विभाग ने अब तक केवल 125 कनेक्शन ही क्यों दिए? बाकी 675 पंडालों में चल रही अवैध बिजली से हादसे होना तय था। लेकिन विभाग और प्रशासन आंख मूंदकर बैठा रहा। हादसों के बाद जांच समितियां गठित करने और नोटिस थमाने का दिखावा अब किस काम का? क्या मासूम बच्चों की जान जाने के बाद ही विभाग की नींद टूटती है?

बिजली कंपनी खुद मान रही है कि डेकोरेटरों ने चोरी के कनेक्शन लिए, अर्थिंग नहीं दी और सीधे खंभों से तार जोड़ दिए। कटी हुई वायरिंग पर पन्नी लपेटकर काम चलाया गया, पाइपों को पोल से टिकाया गया और लोड संतुलित किए बिना बिजली खींची गई। यह लापरवाही नहीं बल्कि मौत को न्योता देने वाली आपराधिक मनमानी है।

आज सवाल यह है कि इन मौतों का जिम्मेदार सिर्फ डेकोरेटर है या वह बिजली विभाग भी, जिसने कागजों में नियम बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया? जब हर साल हजारों पंडाल सजते हैं, तो विभाग की ड्यूटी थी कि सख्ती से कनेक्शन की जांच करता। लेकिन यहां तो बच्चों की चीखें और परिवारों के आंसुओं के बाद ही एक्शन का नाटक रचा जा रहा है।

जबलपुर के ये हादसे चेतावनी हैं कि अगर अब भी बिजली विभाग और प्रशासन नहीं जागे तो आने वाले दिनों में नवरात्र का उल्लास और कितने घरों में मातम बनकर पहुंचेगा।

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