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DB l गुंडों पर STF, लेकिन चोरियों पर नहीं दिखती पक्की रणनीति, ‘पकड़ा-छोड़ा’ की छवि से बढ़ रहा चोरों का मनोबल

गुंडों या गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस अक्सर “स्पेशल टास्क फोर्स” बनाकर तेज़ कार्रवाई करती है और ऐसे मामलों को मीडिया में भी खूब कवरेज मिलता है। लेकिन चोरी जैसे अपराधों के लिए शायद ही कभी कोई सुनियोजित और लंबे समय तक चलने वाला अभियान दिखता है। नतीजा यह होता है कि छोटे-बड़े चोर बेख़ौफ़ होकर वारदात करते रहते हैं और आम लोगों में यह धारणा बन जाती है कि पुलिस बस “पकड़ा-छोड़ा” का खेल खेल रही है, जिससे अपराधियों का हौसला और बढ़ जाता है।

हाल ही मे जबलपुर सिहोरा के खितौला में स्थित इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में सोमवार सुबह 15 करोड़ से ज्यादा की डकैती ने सनसनी फैला दी। पांच हथियारबंद नकाबपोश बदमाशों ने 27 मिनट में 14 किलो 875 ग्राम सोना और 5 लाख नकद लूट लिए। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि वारदात के बाद डकैत 24 घंटे तक घटनास्थल से करीब 31 किलोमीटर दूर इंद्राना में एक किराए के मकान में रुके रहे और पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखते रहे। अगले दिन वे बाइक से फरार हो गए।

पुलिस के अनुसार, डकैतों ने वारदात से सात दिन पहले इंद्राना निवासी इंद्रजीत विश्वकर्मा का घर दलाल के जरिए किराए पर लिया था। वहां से वे रोजाना अलग-अलग बाइकों से हेलमेट लगाकर बैंक की रेकी करने आते थे। सोमवार सुबह 8:55 पर बैंक खुलते ही पांचों बदमाश कट्टा और रिवॉल्वर अड़ाकर अंदर घुसे, कर्मचारियों को बाथरूम में बंद किया और मैनेजर से लॉकर खुलवाकर सोना व नकद लूट लिया। बैंक में मौजूद ऑपरेशन मैनेजर अंकित सोनी ने बताया कि लॉकर दो चाबियों से खुलता है। दूसरी चाबी रीना पटेल के पास थी, जो 9:05 पर पहुंचीं। उनके आते ही डकैतों ने उन्हें भी बंधक बनाकर लॉकर खुलवाया। घटना के दौरान सभी बदमाशों ने चेहरे ढक रखे थे और हाथों में ग्लव्स पहने थे ताकि कोई फिंगरप्रिंट न मिले। पुलिस ने मकान मालिक और दलाल को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। किराए के मकान से हथियार, खाली बैग और कपड़े बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया है कि वारदात का मास्टरमाइंड पाटन का एक युवक है, जिसने बाहर से गैंग बुलाकर डकैती करवाई। अनुमान है कि कम से कम तीन आरोपी बाहर के हैं। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि डकैतों ने सात दिन तक बैंक का शेड्यूल परखा और कम भीड़ वाले समय को चुना।

पुलिस सभी संदिग्धों को राउंडअप कर रही है और कटनी के पारधी गिरोह पर भी शक जता रही है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने दावा किया है कि एक आरोपी की तस्वीर मिली है और जल्द गिरफ्तारी होगी। यह वारदात न केवल जिले की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संगठित अपराधी कितनी बारीकी से योजना बनाकर बड़े अपराध को अंजाम दे सकते हैं।

चोरी की बढ़ती घटनाओं के पीछे कई कारण हैं। अक्सर चोरी के मामले छोटे और बिखरे हुए होते हैं, जिसमें अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग लोग शामिल होते हैं, जिससे पुलिस का ध्यान एक जगह केंद्रित नहीं हो पाता और अपराधी बच निकलते हैं। कानूनी व्यवस्था की कमज़ोरी भी एक बड़ा कारण है—कई बार चोरी में पकड़े गए आरोपी ज़मानत पर जल्दी बाहर आ जाते हैं और फिर दोबारा वही अपराध करने लगते हैं। इसके अलावा, मीडिया में चोरी के मामलों को उतना महत्व नहीं दिया जाता जितना किसी बड़े अपराधी या गैंग को पकड़ने पर मिलता है, जिससे इन पर जनदबाव भी कम बनता है। पुलिस बल की कमी और स्टाफ का बड़ा हिस्सा VIP ड्यूटी या अन्य ऑपरेशन्स में लग जाना भी गश्त और जांच को प्रभावित करता है। यदि चोरी रोकने के लिए लगातार और पब्लिक की भागीदारी के साथ एक “एंटी-थेफ्ट ड्राइव” चलाई जाए, जिसमें मजबूत CCTV नेटवर्क, सक्रिय मुखबिर तंत्र और रात्री गश्त की पब्लिक रिपोर्टिंग शामिल हो तो अपराधियों में फिर से डर का माहौल पैदा किया जा सकता है।

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