जबलपुर l “स्वच्छता संस्कार-सफाई साथी आपके द्वार” कार्यक्रम का शुभारंभ उत्साहपूर्वक मानस भवन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विधायकगण, जिला पंचायत अध्यक्ष, भाजपा के ग्रामीण अध्यक्ष, कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत, सभी जनपद सीईओ, गणमान्य नागरिक तथा पंचायत, महिला एवं बाल विकास व शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बताया गया कि लगातार चल रहे स्वच्छता अभियानों से लोगों की सोच बदली है और अब इसे एक सामाजिक चुनौती के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। संपूर्ण स्वच्छता में जनभागीदारी को अनिवार्य मानते हुए इसे रोजगार और नई तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया गया। यह अपेक्षा व्यक्त की गई कि जबलपुर स्वच्छता के क्षेत्र में नया मुकाम हासिल करेगा और आने वाले वर्षों में “सफाई मित्र पुरस्कार” की चर्चा हर जगह होगी। राष्ट्रीय पर्वों से पूर्व गांवों को पूरी तरह स्वच्छ रखने और अभियान के फीडबैक हेतु नियमित समीक्षा की भी घोषणा की गई।
विधायकों ने अपने उद्बोधनों में स्वच्छता को जनचेतना का हिस्सा बनाने पर बल दिया। स्वच्छता में नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं और सामुदायिक शौचालयों की सफाई एक बड़ी चुनौती है, जिसे जागरूकता और सहयोग से दूर किया जा सकता है। स्वच्छता को स्वास्थ्य से सीधे जोड़ते हुए इसे जीवन का हिस्सा बनाने और बीमारियों से बचाव के लिए अपनाने की अपील की गई। साथ ही, स्वच्छता को मानवता का पर्याय और ईश्वरतुल्य मानते हुए आने वाली पीढ़ियों को इसका संदेश देने पर जोर दिया गया।

उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि देशभक्ति और स्वच्छता का यह संगम एक अनूठा उत्सव है, जिसे हर व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष ने हर घर स्वच्छता पर जोर देते हुए सामुदायिक भागीदारी को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूह (SHG) की लखपति बहनों को 2.25 करोड़ रुपये के सीसीएल वितरित किए गए। सफाई साथियों को स्वच्छता किट प्रदान कर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। उपस्थित जनसमूह ने “हर घर तिरंगा, स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग” की भावना से प्रेरित होकर तिरंगा लहराया और स्वच्छता लोगो का विमोचन किया।

यह पहल मध्यप्रदेश में जनभागीदारी आधारित अपनी तरह की पहली योजना है, जिसका उद्देश्य न केवल स्वच्छता बनाए रखना है, बल्कि लोगों में इसके प्रति स्थायी संस्कार विकसित करना भी है। आयोजन ने साफ संदेश दिया कि स्वच्छता अब केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।
