DBl अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। नाटो के साथ हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने न सिर्फ यूरोपीय देशों पर टैरिफ़ लगाने की धमकी वापस ली, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए अमेरिका किसी तरह का सैन्य बल प्रयोग नहीं करेगा। ट्रंप के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम कूटनीतिक यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि नाटो प्रमुख मार्क रुटे के साथ उनकी “बेहद सार्थक मुलाकात” हुई है, जिसके बाद ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर एक संभावित भविष्य के समझौते का “फ़्रेमवर्क” तैयार हुआ है। हालांकि उन्होंने इस फ्रेमवर्क का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया। नाटो ने भी इस बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि चर्चाएं आर्कटिक क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा पर केंद्रित रहेंगी।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम, दावोस में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लिए बातचीत चाहता है, न कि बल प्रयोग। इससे पहले उन्होंने ग्रीनलैंड के अधिग्रहण का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 से 25 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाने की चेतावनी दी थी। लेकिन यूरोप की कड़ी प्रतिक्रिया और जवाबी कदमों के संकेत के बाद ट्रंप ने यह योजना फिलहाल छोड़ दी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड बेचने की आशंका ने भी अमेरिका पर दबाव बढ़ाया। अमेरिका पर पहले ही 38 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का राष्ट्रीय कर्ज़ है और ऐसे में बॉन्ड बाज़ार में अस्थिरता उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती थी।
ट्रंप के नरम रुख का असर वैश्विक बाज़ारों पर भी दिखा। एशिया और यूरोप के शेयर बाज़ारों में सकारात्मक माहौल बना। फिलहाल संकेत यही हैं कि ग्रीनलैंड मुद्दे पर अमेरिका और यूरोप टकराव की बजाय बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।
