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DB l भारत ने 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह, गौरव और नई परंपराओं के साथ मनाया। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तिरंगा फहराया, जिसके बाद परेड और झांकियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। इस वर्ष गणतंत्र दिवस की थीम राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर आधारित रही, जिसे पूरे आयोजन में प्रमुखता दी गई।

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इस बार कर्तव्य पथ पर कई ऐतिहासिक बदलाव नजर आए। परेड के दौरान बनाए गए एनक्लोजरों को वीवीआईपी जैसे लेबल की जगह देश की प्रमुख नदियों के नाम दिए गए। गंगा, यमुना, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कावेरी, सिंधु सहित कई नदियों के नामों से एनक्लोजरों की पहचान की गई। रक्षा मंत्रालय ने इस पहल के जरिए भारत की विशाल प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता का संदेश दिया। वहीं 29 जनवरी को होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह में एनक्लोजरों के नाम भारतीय वाद्य यंत्रों—तबला, वीणा, शहनाई, मृदंगम और सितार—पर रखे जाएंगे।

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परेड में कुल 30 झांकियां शामिल रहीं, जिनमें 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा 13 मंत्रालयों की झलक दिखाई दी। उत्तर प्रदेश की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसकी थीम ‘बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता’ थी। इसमें कालिंजर किले, नीलकंठ महादेव मंदिर, एकमुखी लिंग, बुंदेली लोक नृत्य और ODOP योजना के तहत पारंपरिक शिल्पों का भव्य चित्रण किया गया।

सैन्य शक्ति के प्रदर्शन में DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार परेड में प्रदर्शित की गई, जिसने सबका ध्यान खींचा। इसके अलावा पहली बार भारतीय सेना के पशु दस्ते—सेना के कुत्ते, शिकारी पक्षी, ऊंट और जांस्कर पोनी—ने परेड में भाग लेकर ‘मूक योद्धाओं’ की अहम भूमिका को रेखांकित किया।

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समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कुल मिलाकर 77वां गणतंत्र दिवस परंपरा और परिवर्तन, संस्कृति और आधुनिकता, तथा शक्ति और संवेदना का अद्भुत संगम बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।

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