नौ दिन, तीन बार पोस्टमार्टम, फिर भी रहस्य बरकरार, शिक्षिका मनीषा मौत केस ने पुलिस की जांच पर खड़े किए सवालl
DB l भिवानी जिले में 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की रहस्यमयी मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। यह मामला पुलिस और सरकार के लिए सिरदर्द तो प्रदेशवासियों के लिए अबूझ पहेली बन गया है। 11 अगस्त को मनीषा गायब हुई थी और 13 अगस्त की सुबह उसका गला सड़ा शव सिंघानी नहर के पास मिला। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बेटी की तलाश की बजाय उसके चरित्र पर सवाल उठाए और जांच को गंभीरता से नहीं लिया।
अब तक तीन बार पोस्टमार्टम हो चुका है। पहली रिपोर्ट में गला काटने व अंग गायब होने की पुष्टि कर इसे हत्या माना गया। दूसरी रिपोर्ट रोहतक पीजीआई से आई, जिसमें जहरीला पदार्थ निगलने को मौत का कारण बताया गया और मामला आत्महत्या की ओर मोड़ दिया गया। अब एम्स दिल्ली में तीसरे पोस्टमार्टम की रिसैंपलिंग हुई है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। विसरा की एफएसएल रिपोर्ट जहरीला पदार्थ निगलने की पुष्टि करती है, लेकिन मौके से कोई शीशी या पुख्ता सबूत नहीं मिले।

कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं—जहरीला पदार्थ कहां से खरीदा गया, खरीद की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं हुई, आत्महत्या की स्थिति में शव के पास बोतल क्यों नहीं मिली, पुलिस ने पांच दिन तक सुसाइड नोट क्यों छिपाया, और मोबाइल फोन अब तक बरामद क्यों नहीं हो पाया। तीन बार सीन रिक्रिएट और 15 से ज्यादा लोगों से पूछताछ के बावजूद पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा।
मनीषा की मौत को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश है। भिवानी और चरखी दादरी में तनाव, आंदोलन और शांति भंग होने की आशंका के चलते हरियाणा सरकार ने इन जिलों में मोबाइल इंटरनेट, बल्क एसएमएस और डोंगल सेवाओं पर लगी रोक को 24 घंटे और बढ़ाकर 22 अगस्त तक लागू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अफवाहें और भड़काऊ सामग्री फैलने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
लगातार बदलती थ्योरी और विरोधाभासी रिपोर्टों ने मनीषा की मौत को और रहस्यमय बना दिया है। अब सबकी निगाहें एम्स दिल्ली की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह गुत्थी सुलझने की उम्मीद है।
